
रांची। हजारीबाग में खास महाल जमीन को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान हुए विवाद का मामला अब कांग्रेस संगठन तक पहुंच गया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने पूर्व मंत्री और पार्टी नेता योगेंद्र साव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी ने उनसे तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के साथ ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा है।
पार्टी की ओर से जारी नोटिस में योगेंद्र साव से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ कांग्रेस संविधान के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी है।
हजारीबाग में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान हुआ था विवाद
पूरा मामला 18 सितंबर को हजारीबाग के हुरहुरू इलाके में खास महाल जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है। प्रशासनिक टीम पुलिस बल और जेसीबी के साथ मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत के बाद पहले भी कार्रवाई के प्रयास किए जा चुके थे।
कार्रवाई के दौरान योगेंद्र साव भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया। जमीन पर मौजूद पीसीसी सड़क और गौशाला के शेड को हटाने को लेकर उनकी अधिकारियों से तीखी बहस हुई। बताया गया कि काफी देर तक मौके पर विवाद की स्थिति बनी रही।
जमीन के स्वामित्व को लेकर आमने-सामने दावे
योगेंद्र साव ने प्रशासन से कार्रवाई से संबंधित आदेश दिखाने की मांग की थी। उनका दावा था कि जिस जमीन पर कार्रवाई की जा रही है, वह सरकारी नहीं बल्कि पुश्तैनी जमीन है। उन्होंने यह भी कहा था कि जमीन मालिक की ओर से उन्हें पावर दिया गया है और जमीन का अब तक रिज्यूमेशन नहीं हुआ है।
वहीं, प्रशासन का पक्ष इसके विपरीत है। अधिकारियों के मुताबिक संबंधित भूमि खास महाल की सरकारी जमीन है और उस पर किए गए निर्माण को अतिक्रमण की श्रेणी में रखा गया है। इसी आधार पर प्रशासन ने पीसीसी सड़क, गौशाला के शेड और घेराबंदी के कुछ हिस्सों को हटाया।
मुख्यमंत्री पर बयान भी बना नोटिस का आधार
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद योगेंद्र साव ने मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सरकार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उनके सार्वजनिक बयानों और पार्टी अनुशासन से जुड़े आचरण को भी नोटिस में आधार बनाया है।
पार्टी का कहना है कि संगठन में रहते हुए सार्वजनिक रूप से दिए गए ऐसे बयान पार्टी अनुशासन के दायरे में आते हैं। इसी को लेकर अब उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
पहले भी कार्रवाई झेल चुके हैं योगेंद्र साव
कांग्रेस की ओर से जारी नोटिस में योगेंद्र साव के खिलाफ पूर्व में हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। पार्टी के अनुसार, पहले भी उन्हें संगठन से निष्कासित किया गया था, हालांकि बाद में यह फैसला वापस ले लिया गया था।
ताजा घटनाक्रम के बाद एक बार फिर अनुशासन समिति ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। अब तीन दिनों के भीतर योगेंद्र साव की ओर से दिए जाने वाले जवाब के आधार पर कांग्रेस अनुशासन समिति आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला करेगी।







