
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत देशभर में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई कथित तौर पर NHAI के टोल प्लाजा पर फर्जी तरीके से टोल वसूली और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के सिलसिले में की गई है।
जानकारी के मुताबिक, ईडी की अलग-अलग टीमों ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, एनसीआर और कोलकाता में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने संदिग्ध व्यक्तियों और संस्थानों से जुड़े परिसरों को खंगाला तथा वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की जांच की।
टोल वसूली में कैसे हुआ कथित फर्जीवाड़ा?
जांच का केंद्र राष्ट्रीय राजमार्गों पर संचालित टोल प्लाजा से होने वाली वसूली बताई जा रही है। इससे पहले NHAI से जुड़े एक बड़े टोल टैक्स फर्जीवाड़े की जांच में सामने आया था कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर टोल कलेक्शन सिस्टम में हेरफेर कर रकम को गलत तरीके से डायवर्ट किया था।
2025 में उत्तर प्रदेश STF ने ऐसे ही एक मामले में कार्रवाई करते हुए एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप लगा था कि एक अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए NHAI की टोल वसूली व्यवस्था में हेरफेर किया गया और कई टोल प्लाजा पर गैर-FASTag वाहनों से मिलने वाली रकम का हिस्सा कथित तौर पर निजी खातों में भेजा जाता था। यह नेटवर्क कई राज्यों के टोल प्लाजा तक फैला होने का दावा किया गया था।
अब ED क्यों पहुंची?
टोल वसूली में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों में जब अवैध तरीके से हासिल रकम को अलग-अलग खातों, कंपनियों या अन्य माध्यमों से खपाने अथवा उसका स्वरूप बदलने का संदेह होता है, तो मामला मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में आ सकता है। इसी कड़ी में ED ने PMLA के तहत तलाशी अभियान शुरू किया है।
ताजा कार्रवाई में जांच एजेंसी का फोकस कथित फर्जी टोल वसूली से जुड़े पैसों के लेनदेन, बैंक खातों, कंपनियों और संबंधित लोगों के वित्तीय नेटवर्क पर बताया जा रहा है।
कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई
ED की कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा है। एजेंसी की टीमें:
उत्तर प्रदेश
राजस्थान
महाराष्ट्र
जम्मू-कश्मीर
मध्य प्रदेश
एनसीआर
कोलकाता
समेत अलग-अलग स्थानों पर पहुंचीं। कई जगहों पर एक साथ तलाशी लिए जाने से संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी कथित टोल वसूली नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग लिंक को खंगाल रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं टोल वसूली में घोटाले
देश में टोल वसूली से जुड़ी अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। 2025 में NHAI ने अनियमित टोल वसूली के मामलों में 14 टोल कलेक्शन एजेंसियों को डिबार किया था। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश STF की जांच के बाद सामने आए टोल टैक्स फर्जीवाड़े से जुड़ी थी।
वहीं, केरल के पल्लियेक्करा टोल प्लाजा से जुड़े एक अलग मामले में भी ED ने पहले कार्रवाई की थी। उस जांच में एजेंसी ने आरोप लगाया था कि निर्माण कार्य पूरा हुए बिना टोल वसूली शुरू की गई और NHAI को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। ED की कार्रवाई में करीब 125.21 करोड़ रुपये की संपत्तियों/रकम को फ्रीज किए जाने की जानकारी संसद में भी दी गई थी।
आगे क्या होगा?
14 ठिकानों पर हुई तलाशी के बाद अब ED कथित तौर पर बरामद दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय सबूतों का विश्लेषण करेगी। जांच में यदि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की पुष्टि होती है तो एजेंसी आगे संपत्ति अटैच करने, पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
फिलहाल इस ताजा कार्रवाई में कितनी नकदी या संपत्ति बरामद हुई, किन लोगों या कंपनियों के ठिकानों पर छापा पड़ा और कुल कितनी रकम के फर्जीवाड़े का आरोप है, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। ED की आगे की जांच के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है।






