July 26, 2026

सरकार ने हाई-डोज ‘निमेसुलाइड’ टैबलेट पर लगाया बैन, स्वास्थ्य के लिए बताया खतरा

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नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम लोगों की सेहत से जुड़े गंभीर जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लोकप्रिय दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड को लेकर अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में निमेसुलाइड युक्त सभी मौखिक दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।


स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह प्रतिबंध औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत लगाया गया है। मंत्रालय का कहना है कि 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में निमेसुलाइड का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है।


क्यों लिया गया यह फैसला?


निमेसुलाइड एक गैर-स्टेरॉयडल सूजनरोधी दवा (NSAID) है, जिसका उपयोग दर्द, सूजन और बुखार के इलाज में किया जाता रहा है। हालांकि, बीते वर्षों में इस दवा को लेकर संभावित यकृत विषाक्तता (लीवर डैमेज) और अन्य गंभीर दुष्प्रभावों की आशंकाएं सामने आती रही हैं। इन्हीं खतरों को देखते हुए यह दवा वैश्विक स्तर पर भी जांच और विवाद के दायरे में रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक मात्रा में निमेसुलाइड लेने से लीवर पर गंभीर असर पड़ सकता है, जो कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी कारण सरकार ने उच्च खुराक वाली दवाओं पर सख्ती दिखाने का फैसला किया है।


सुरक्षित विकल्प मौजूद


स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दर्द और सूजन के इलाज के लिए निमेसुलाइड के सुरक्षित विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। ऐसे में मरीजों को अब डॉक्टर की सलाह पर वैकल्पिक दवाओं का उपयोग करना चाहिए और बिना परामर्श के किसी भी दर्द निवारक का सेवन करने से बचना चाहिए।


दवा कंपनियों और बाजार पर असर


इस फैसले के बाद दवा कंपनियों को 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड युक्त मौखिक दवाओं का उत्पादन और बिक्री तुरंत बंद करनी होगी। साथ ही दवा विक्रेताओं को भी ऐसे उत्पादों को बाजार से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।


सुरक्षा मानकों को सख्त करने की दिशा में कदम


स्वास्थ्य मंत्रालय का यह निर्णय दवाओं की सुरक्षा से जुड़े मानकों को और मजबूत करने तथा उच्च जोखिम वाली दवाओं को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की नीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं ही उपलब्ध कराई जाएं।

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