नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न बाधाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहराने लगा है। इस संभावित खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 से आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) के प्रावधानों को लागू करते हुए देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति तथा वितरण पर सख्त नियंत्रण शुरू कर दिया है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित न हो। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में तेल रिफाइनरी कंपनियों को उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया है।
रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
मंत्रालय ने सभी रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल कर अधिकतम मात्रा में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस का उत्पादन करें। साथ ही स्पष्ट कर दिया गया है कि इन दोनों गैसों का उपयोग फिलहाल पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए नहीं किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि इन संसाधनों को प्राथमिकता के साथ रसोई गैस उत्पादन में लगाया जाए तो घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) को भी निर्देश दिया गया है कि इस विशेष व्यवस्था के तहत उत्पादित LPG की आपूर्ति मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं को ही की जाए। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में गैस आपूर्ति को जरूरत के हिसाब से नियंत्रित किया जा सकता है ताकि घरों में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 ऐसा कानून है जिसके तहत सरकार जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य आम जनता को आवश्यक वस्तुएं उचित कीमत पर उपलब्ध कराना और जमाखोरी या कालाबाजारी को रोकना है।
इस अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार किसी भी आवश्यक वस्तु की स्टॉक सीमा तय कर सकती है और उसके व्यापार को विनियमित कर सकती है। वहीं धारा 7 में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा और जेल का प्रावधान किया गया है।
बाद के वर्षों में इस कानून के दायरे को बढ़ाया गया और इसमें खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों तथा दवाओं जैसी जरूरी वस्तुओं को भी शामिल किया गया।
यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए भारत सरकार पहले से ही एहतियाती कदम उठा रही है ताकि देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहे।












