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बहरागोड़ा. बहरागोड़ा प्रखंड का बेनासोली काजू जंगल इन दिनों जंगली हाथियों का नया ठिकाना बन गया है. काजू जंगल में 6 से अधिक जंगली हाथियों के जमावड़े से मानुषमुड़िया समेत आसपास के दर्जनों गांवों में भारी दहशत का माहौल है. शाम होते ही इलाके में सन्नाटा पसर जाता है और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो जाते हैं. मुख्य सड़क पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है: हाथियों का यह झुंड भोजन और पानी की तलाश में देर रात सीधे मटिहाना-चाकुलिया मुख्य सड़क पर आ रहा है. इससे रात के समय सड़क पर सफर करने वाले वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को जान-माल का गंभीर खतरा रहता है. हाथी खेतों में घूम रहे हैं और किसानों की धान की फसल और चारे को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं. अलर्ट मोड पर वन विभाग, दिए सख्त निर्देश: मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम लगातार इलाके में कैंप कर रही है. वनकर्मी हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं और उन्हें घने जंगलों की ओर सुरक्षित खदेड़ने का प्रयास कर रहे हैं. ग्रामीणों से अपील है कि वे हाथियों को बिल्कुल भी न उकसाएं और रात के समय इस रास्ते पर जाने से बचें. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में हाथियों का उत्पात हर साल बढ़ रहा है. दहशत के साये में जी रहे लोगों ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि हाथियों को सिर्फ खदेड़ने की बजाय हाथी-मानव संघर्ष को रोकने का कोई स्थायी ठोस समाधान निकाला जाये, ताकि जान-माल दोनों की सुरक्षा की जा सके. भास्कर न्यूज धालभूमगढ़ चाकुलिया प्रखंड क्षेत्र के कलियाम में सूरज ढलते ही यहां के ग्रामीणों की जिंदगी खौफजदा हो जाती है। इन दिनों राजाबासा जंगल में 20 से 30 जंगली हाथियों का झुंड डेरा जमाए हुए है, जिससे कालियाम, हाथीबाड़ी, जंबोनी, भुरसानी, गोदराशोल, चतराडोबा, सुनसुनिया, गोहरडांगरा शालबनी समेत दर्जनों गांवों के लोग काफी दहशत में जीने को मजबूर हैं. हाथियों का यह दल कब और कहां रुख करेगा, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है, जिसके कारण ग्रामीण हर रात जागकर गुजारने को मजबूर हैं. घरों को बना रहे निशाना, खा रहे अनाज: हाथियों का उत्पात इस हद तक बढ़ गया है कि वे अब सीधे रिहायशी इलाकों में घुस रहे हैं. बीते शनिवार की रात जंगली हाथियों ने कलियाम गांव निवासी सीमांत महतो के पक्के घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गये और घर में रखे करीब 2 क्विंटल धान को पूरी तरह से चट कर गये. हाथी के इस हमले से पूरे परिवार में दहशत का माहौल है. इससे पहले भी कई ग्रामीणों के घरों को जंगली हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है, जबकि आसपास के बांस बागानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है. सब्जी की खेती बर्बाद, पहचान खो रहा कलियाम मौजा : जंगली हाथियों के स्थायी आतंक का सबसे बुरा असर स्थानीय किसानों की आजीविका पर पड़ा है. कलियाम मौजा कभी सब्जी उत्पादन के लिए पूरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता था। यहां के खेतों में खीरा, परवल, लौकी, आलू, बैंगन, टमाटर, तरबूज और कद्दू समेत कई तरह की सब्जियों की बंपर पैदावार हुई। लेकिन लगातार हाथियों के उत्पात और भारी नुकसान के कारण किसानों ने अब सब्जी की खेती पूरी तरह से छोड़ दी है. पलायन को मजबूर हैं ग्रामीण : खेती चौपट होने और हर दिन मंडराते मौत के साये के कारण अब क्षेत्र के युवा और किसान अपने ग्रामीण परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेती छोड़ काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश: ग्रामीणों का आरोप है कि इस कठिन परिस्थिति में भी वन विभाग पूरी तरह से शिथिल और उदासीन बना हुआ है. हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने या उन्हें भगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. वन विभाग की इस लचर कार्यशैली को लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी आक्रोश है. ग्रामीण जंगली हाथियों की समस्या के स्थायी समाधान और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने के लिए प्रशासन और वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की पुरजोर मांग कर रहे हैं.
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