
रांची16 घंटे पहलेलेखक: कौशल आनंद
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जेबीवीएनएल ने ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को भेजा प्रस्ताव; ग्रिड से सबस्टेशन की दूरी 35 किमी से घटकर 12 किमी हो जायेगी. झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने रांची में निर्बाध 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। निगम ने शहर में छह नये 132/33 केवी जीआइएस ग्रिड बनाने का प्रस्ताव ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को भेजा है.
मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। नए ग्रिडों के निर्माण से ग्रिड और पावर सब-स्टेशनों के बीच की दूरी कम हो जाएगी, जिससे लाइन लॉस, वोल्टेज ड्रॉप, ब्रेकडाउन और लंबे समय तक बिजली कटौती की समस्या कम हो जाएगी।
फिलहाल नामकुम, हटिया, कांके और स्मार्ट सिटी जीआइएस ग्रिड से जुड़े कई 33/11 केवी पावर सब स्टेशन 30 से 35 किमी दूर हैं, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार यह दूरी करीब 12 किमी है. होना चाहिये। रांची में हर साल मार्च से मई के दौरान 33 केवी के अधिकांश फीडर आंधी-तूफान के कारण क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. तार टूटने या पेड़ गिरने के बाद फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे ठीक करने में कई घंटे लग जाते हैं, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है. बिजली अधिकारियों के मुताबिक इसका मुख्य कारण ग्रिड और पावर सब स्टेशनों के बीच अत्यधिक दूरी है.
इन 6 स्थानों पर नए ग्रिड बनाए जाएंगे, प्रत्येक की क्षमता 200 एमवीए होगी जेबीवीएनएल ने कुसाई, रिम्स डॉक्टर कॉलोनी/बूटी पानी टंकी पहाड़, नामकुम के सरवल, हटिया के दासमाइल, इटकी के नवा सोसो क्षेत्र और कांके में नया जीआईएस ग्रिड बनाने का प्रस्ताव दिया है. ये ग्रिड निकटतम उप-स्टेशनों को निकटतम स्रोत से बिजली प्रदान करेंगे और लंबी 33 केवी लाइनों पर निर्भरता कम करेंगे। वहीं, ग्रिड से सब स्टेशन की दूरी अधिक होने से लाइन लॉस बढ़ता है, वोल्टेज ड्रॉप होता है और खराब मौसम में फॉल्ट की संभावना भी बढ़ जाती है. इस समस्या को दूर करने के लिए छह नए जीआईएस ग्रिड प्रस्तावित किए गए हैं। प्रत्येक ग्रिड 200 एमवीए क्षमता का होगा, जिसमें 50-50 एमवीए के चार पावर ट्रांसफार्मर लगाये जायेंगे.
50 साल में ग्रिड नहीं, चार पुराने ग्रिड पर पूरा भार बढ़ा शहर फिलहाल रांची की बिजली आपूर्ति चार ग्रिड हटिया, नामकुम, कांके और स्मार्ट सिटी जीआईएस ग्रिड पर निर्भर है. हटिया ग्रिड की स्थापना 1973-74 में और नामकुम ग्रिड की स्थापना 1987-88 में हुई थी। बढ़ते लोड को देखते हुए 2013 में कांके ग्रिड और बाद में स्मार्ट सिटी जीआइएस ग्रिड की शुरुआत की गयी. जब हटिया ग्रिड का निर्माण हुआ था, तब शहर में मात्र 4-5 पावर सब स्टेशन थे, जबकि आज इनकी संख्या 60 से अधिक हो गयी है.
ग्रिड से सब स्टेशन की अधिक दूरी बिजली आपूर्ति में बड़ी बाधा है. बिजली उपकेंद्रों की ग्रिड से दूरी निर्बाध बिजली आपूर्ति में सबसे बड़ी तकनीकी बाधाओं में से एक है। इस दूरी को कम करने के लिए रांची में छह नये जीआइएस ग्रिड का प्रस्ताव ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को भेजा गया है. स्थान भी चिह्नित कर लिए गए हैं। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इनके बनने से लाइन लॉस भी काफी कम हो जाएगा। -मनमोहन कुमार, महाप्रबंधक, रांची, जेबीवीएनएल





