रांची: मैट्रिक के एक छात्र को दस दिनों तक हिरासत में रखने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। अदालत ने न सिर्फ चतरा के डीएसपी, बल्कि टंडवा और लावालौंग थाना प्रभारी को तलब किया, बल्कि सुनवाई के दौरान तीनों अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर उन्हें कोर्ट रूम में ही बैठा दिया। इस असाधारण कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई
मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने की। दरअसल, चतरा के लावालौंग थाना की पुलिस ने मैट्रिक के नाबालिग छात्र को अवैध रूप में हिरासत में रखा था। यह कार्रवाई छात्र की मां द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर की गई। अदालत ने चतरा के पुलिस अधीक्षक (SP) को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया और पुलिस से सीधे सवाल किए।
हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर किस कानून के तहत मैट्रिक छात्र को हिरासत में लिया गया। उसे 10 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में क्यों रखा गया। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या इस मामले में कोई केस डायरी तैयार की गई है या नहीं। कोर्ट ने 26 और 27 जनवरी की दरम्यानी रात छात्र को उसके घर से उठाए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। इन सवालों पर चतरा डीएसपी ने अदालत को बताया कि पूरे घटनाक्रम का उल्लेख स्टेशन डायरी में है।
केस डायरी को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं
इसके बाद अदालत ने मोबाइल फोन के माध्यम से चतरा एसपी से संपर्क कर केस डायरी से जुड़ी जानकारी मांगी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या केस डायरी में बच्चे को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का कोई ठोस उल्लेख है। पुलिस की ओर से स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
अदालत ने चतरा डीएसपी, टंडवा और लावालौंग थाना प्रभारी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और तीनों अधिकारियों को कोर्ट रूम में ही बैठा दिया। यह दृश्य कोर्ट में मौजूद लोगों के लिए भी चौंकाने वाला था।
पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
जानकारी के मुताबिक, लावालौंग थाना पुलिस ने 26 और 27 जनवरी की रात नाबालिग को उसके घर से उठाया था और बाद में उसे टंडवा थाना को सौंप दिया गया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या टंडवा थाने में कांड संख्या 26/2026 दर्ज थी और अगर उसी केस में पूछताछ हुई थी, तो उसका उल्लेख केस डायरी में क्यों नहीं है।
अगली सुनवाई 13 फरवरी को
हाईकोर्ट ने अनुसंधानकर्ता को केस डायरी प्रस्तुत करने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में सभी संबंधित पुलिस अधिकारी सशरीर उपस्थित रहें।
हालांकि, सुनवाई समाप्त होने के बाद अदालत ने सभी पुलिस अधिकारियों को उनके मोबाइल फोन वापस कर दिए। अब अगली तारीख पर हाईकोर्ट यह तय करेगा कि क्या पुलिस ने नियमों और कानून का उल्लंघन किया है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।












