{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{"transform":1},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":true,"containsFTESticker":false}
रांची: झारखंड के कुख्यात फरार गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर जांच का दायरा अब और बड़ा हो गया है। उसके कथित पाकिस्तान कनेक्शन और संभावित आतंकी नेटवर्क से जुड़े आरोपों की पड़ताल के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) सक्रिय हो गई है। एजेंसी की एक टीम धनबाद पहुंचकर मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में लगी है।
जांच एजेंसी की नजर खास तौर पर प्रिंस खान के विदेशी संपर्कों, पाकिस्तान में उसके कथित नेटवर्क और रंगदारी के पैसों के अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि झारखंड में कारोबारियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम कहीं हवाला नेटवर्क या दूसरे माध्यमों से विदेश तो नहीं भेजी गई।
पूछताछ में सामने आई कई अहम जानकारियां
मामले में प्रिंस खान के करीबी बताए जा रहे सैफ अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर से धनबाद पुलिस की पूछताछ में उसके पाकिस्तान में मौजूद होने और वहां कथित संपर्कों को लेकर कई जानकारियां सामने आने की बात कही गई है।
पूछताछ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, झारखंड में रंगदारी से जुटाई गई रकम को कथित तौर पर हवाला चैनल और दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे जाने का दावा किया गया है। एक रिपोर्ट में दुबई के अल अंसारी एक्सचेंज के माध्यम से रकम पाकिस्तान पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है।
बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड पर भी नजर
जांच एजेंसियों को कथित तौर पर अलग-अलग बैंक खातों के इस्तेमाल और लेन-देन से संबंधित डिजिटल पर्चियों की जानकारी मिली है। ऐसे में NIA इन वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि रकम कहां से आई, किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
सबसे अहम सवाल यही है कि कथित रंगदारी की रकम केवल आपराधिक गतिविधियों तक सीमित रही या फिर उसका कोई हिस्सा आतंकी गतिविधियों अथवा प्रतिबंधित संगठनों तक भी पहुंचा।
ISI और जैश कनेक्शन के दावे की भी होगी पड़ताल
जांच के दौरान यह दावा भी सामने आया है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद प्रिंस खान कथित तौर पर तौकीर बलोच के माध्यम से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में आया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसी द्वारा की जानी बाकी है। NIA उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और पूछताछ में सामने आई सूचनाओं का मिलान कर इन कथित संपर्कों की वास्तविकता जांच सकती है।
अपराध से आतंक तक कनेक्शन की तलाश
प्रिंस खान का नाम लंबे समय से धनबाद और झारखंड में रंगदारी, धमकी और अन्य आपराधिक मामलों से जोड़ा जाता रहा है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि उसका नेटवर्क महज संगठित अपराध तक सीमित था या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अथवा आतंकी नेटवर्क भी सक्रिय था।
यदि जांच के दौरान आतंकवाद से जुड़े आरोपों के समर्थन में पर्याप्त कानूनी साक्ष्य सामने आते हैं, तो मामले में आतंकवाद से संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल NIA की जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर सबकी नजर है। यही साक्ष्य तय करेंगे कि प्रिंस खान के कथित पाकिस्तान कनेक्शन और आतंकी नेटवर्क से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई है।




