
नई दिल्ली/रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सोमवार, 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी/समिति से जांच कराने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार समेत अन्य पक्षों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत के इस कदम को JPSC परीक्षा विवाद में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा में गड़बड़ी या किसी तरह की अनियमितता को सही ठहरा दिया है। संबंधित पक्षों का जवाब मिलने के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। इससे पहले 24 अगस्त को सुनवाई की जानकारी सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और परीक्षा सुधार की मांग कर रहे संगठनों की नजर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर बनी हुई थी।
क्या है पूरा मामला?
मामला JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है। परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई।
याचिका में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। इसमें CBI जांच के अलावा सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का विकल्प भी रखा गया है।
परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की भी उठी मांग
याचिका में कथित गड़बड़ियां साबित होने की स्थिति में परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि परीक्षा के आयोजन और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच आवश्यक है, ताकि अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों का समाधान हो सके।
परीक्षा विवाद के बीच बढ़ा छात्रों का आंदोलन
JPSC मामला ऐसे समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। हाल के दिनों में JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं को लेकर सरकार के फैसलों तथा परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
17 अगस्त को झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार ने वर्ष 2014 से राज्य में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की बात भी कही थी।
इसके बाद 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। इस घटनाक्रम के बाद परीक्षा विवाद और भी पेचीदा हो गया है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब केंद्र और झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि मामले की जांच मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रहेगी या किसी केंद्रीय अथवा स्वतंत्र एजेंसी को जांच सौंपी जाएगी।
अभ्यर्थियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्यवाही पर है। फिलहाल अदालत के नोटिस को जांच के आदेश के रूप में नहीं देखा जा सकता। CBI जांच होगी या नहीं, परीक्षा के संबंध में आगे क्या निर्देश दिए जाएंगे और कथित अनियमितताओं पर अदालत क्या रुख अपनाएगी—इन सभी सवालों पर आगे की सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होगी।
अहम बात: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होना और सरकार को नोटिस जारी होना अपने-आप में परीक्षा में गड़बड़ी साबित नहीं करता। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।






