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सहारा निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए सरकारी पोर्टल में खामियां, सजा भुगत रहे लोग: कुणाल सारंगी

On: August 21, 2024 9:53 AM
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सहारा निवेशकों की मुश्किलें बरकरार, जनता परेशान, सरकार से मांग रही जवाब

जमशेदपुर: सहारा में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए पोर्टल से कुछ खास राहत नहीं मिल रही है। सरकार ने निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए पोर्टल की घोषणा की थी, लेकिन इस व्यवस्था में भी कई खामियां सामने आ रही हैं। उक्त बातें वरिष्ठ नेता कुणाल सारंगी ने कही।

उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने पार्लियामेंट में आश्वासन दिया था कि सहारा में जिन लोगों ने निवेश किया है, उन्हें उनका पूरा पैसा वापस मिलेगा। हालांकि, अब तक की स्थिति बताती है कि ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।

पोर्टल के जरिए हर बार केवल 10 हजार रुपए ही निकालने की अनुमति है, जबकि लोगों की लाखों-करोड़ों की राशि फंसी हुई है। अब तक 4.5 लाख निवेशकों को 370 करोड़ रुपए लौटाए गए हैं, जबकि कुल बकाया राशि 86 हजार करोड़ रुपए है। सहारा में 13 करोड़ लोगों ने पैसा निवेश किया है, लेकिन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने वालों की संख्या मात्र 1.5 करोड़ है। इनमें से सिर्फ 5 लाख लोगों को ही अब तक पैसे मिल पाए हैं, वह भी केवल 10 हजार रुपए प्रति व्यक्ति।

विशेष रूप से जमशेदपुर में स्थिति और भी गंभीर है। यहां करीब 3 से 4 लाख लोगों ने सहारा में 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है, लेकिन अब तक केवल 15 करोड़ रुपए की वापसी हुई है।

सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर कोई सहायता नहीं दी जा रही है। पोर्टल को दिल्ली से संचालित किया जा रहा है, और दस्तावेजों में मामूली गड़बड़ी के कारण आवेदन अस्वीकृत किए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोग अपनी ही जमा पूंजी से वंचित रह जा रहे हैं।

सरकार का यह कदम लोगों को राहत देने के बजाय और परेशानियों में डाल रहा है। अगर सरकार ने तत्काल प्रभाव से व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो निवेशकों को अपने ही पैसे निकालने के लिए सालों तक इंतजार करना पड़ सकता है।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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