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अब पेट्रोल पंप से नहीं होगी मनमानी खरीदारी,डीजल 200 लीटर की सीमा तय

On: June 12, 2026 12:20 PM
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नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नए आदेश के तहत अब किसी भी ग्राहक या वाहन को पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। साथ ही ईंधन की बिक्री केवल वाहन के फ्यूल टैंक या PESO से मंजूर कंटेनरों में ही की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के साथ-साथ आम लोगों के लिए निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
सरकार ने इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंपों से की जाने वाली थोक खरीद पर भी रोक लगा दी है। अब ऐसे बड़े उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का पेट्रोल और डीजल केवल बल्क सेल प्वाइंट यानी थोक बिक्री केंद्रों से ही खरीदना होगा। यह आदेश फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू किया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को “मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए सप्लाई का अस्थायी नियमन) आदेश, 2026” जारी किया है। इसके तहत तेल कंपनियों और अधिकृत फ्यूल रिटेलर्स को अधिकार दिया गया है कि वे रिटेल आउटलेट्स पर थोक खरीदारी को नियंत्रित कर सकें।
सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और शिपिंग व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में देश के कुछ हिस्सों में ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है। इसकी एक बड़ी वजह रिटेल और बल्क कीमतों के बीच का अंतर माना जा रहा है।
दिल्ली में जहां पेट्रोल पंपों पर डीजल करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, वहीं बल्क उपभोक्ताओं के लिए इसकी कीमत लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर पड़ रही है। इसी अंतर का लाभ उठाकर कई बड़े उपभोक्ता रिटेल आउटलेट्स से बड़ी मात्रा में डीजल खरीद रहे थे, जिससे स्थानीय स्तर पर कमी की आशंका बढ़ने लगी थी।
सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी, कालाबाजारी, अवैध ढुलाई और बिना अनुमति बड़े पैमाने पर खरीदारी पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार किसी क्षेत्र, उपभोक्ता समूह या विशेष लेनदेन को इस आदेश से छूट भी दे सकती है।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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