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भास्कर न्यूज जामताड़ा जिले में सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर साफ दिख रहा है। सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. कृषि विभाग के अनुसार, जिले में खरीफ सीजन में 606.86 मिमी बारिश की जरूरत है, लेकिन अब तक 404.03 मिमी बारिश ही दर्ज की गयी है. पिछले साल इसी अवधि में 832.23 मिमी बारिश हुई थी, जो इस साल से लगभग दोगुनी है. बारिश की कमी का सीधा असर धान की रोपनी पर पड़ा है. जिले में 52 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 23,204 हेक्टेयर यानी 44.62 फीसदी रकबे में ही रोपनी हो सकी है. पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने अभी भी खेतों में बुआई शुरू नहीं की है और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. कम बारिश को देखते हुए कृषि विभाग मडुआ (रागी) जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दे रहा है. जामताड़ा सदर प्रखंड के आसनचुवां गांव के किसान इंद्रजीत महतो इस वर्ष दो एकड़ जमीन में मडुआ की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि बदलते मौसम और अनिश्चित बारिश को देखते हुए मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है. कम बारिश का असर पशुपालन पर भी पड़ने लगा है. हरे चारे की संभावित कमी को देखते हुए जेएसएलपीएस क्लस्टर से जुड़ी महिला गीता देवी ने पांच कट्ठा जमीन में लगभग 5,000 नेपियर घास के पौधे लगाए हैं, ताकि जानवरों को साल भर चारा मिलता रहे. वैकल्पिक फसलों पर कृषि विभाग का जोर : धान की तुलना में मक्के की खेती की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. 15,700 हेक्टेयर लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 12,677 हेक्टेयर (80.75 प्रतिशत) क्षेत्र में मक्का की बुआई हो चुकी है। वहीं दलहन के लिए 16,700 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 1,842 हेक्टेयर (11.03 फीसदी) में ही बुआई हो पाई है और तिलहन के लिए 860 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 147 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई है. मोटे अनाज के लिए निर्धारित लक्ष्य 1,690 हेक्टेयर के विरुद्ध अब तक मात्र 30 हेक्टेयर (1.78 प्रतिशत) क्षेत्रफल पर ही खेती हो पायी है.
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