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साकची एमजीएम में सीसीयू विस्तार,पर इमरजेंसी व्यवस्था बेहाल: सौरभ विष्णु का तीखा सवाल

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जमशेदपुर:साकची स्थित पुराने एमजीएम अस्पताल परिसर में 100 नई क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) का निर्माण किया जा रहा है। । इस व्यवस्था को लेकर जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने तीखे सवाल उठाए हैं।

सौरभ ने कहा की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए स्वागत योग्य कदम है, लेकिन गंभीर मरीजों को नई सीसीयू में भर्ती कैसे किया जाएगा? क्या मरीजों को पहले नए एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचना होगा और वहां डॉक्टरों की जांच के बाद उन्हें पुराने एमजीएम परिसर स्थित सीसीयू में शिफ्ट किया जाएगा? एमजीएम की हालत अब ऐसी हो गई है कि एक तरफ करोड़ों की योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मरीजों की मूल जरूरतों और आपातकालीन व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। करोड़ो योजना”अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसी व्यवस्था को दिखाती है।

सौरभ विष्णु ने सवाल किया कि हार्ट अटैक, गंभीर दुर्घटना या जिंदगी से जूझ रहे मरीज को डिमना से मानगो ब्रिज तक जाम और निर्माण कार्यों के बीच साकची एमजीएम परिसर में ले जाना कितना सुरक्षित होगा? गंभीर मरीजों के लिए हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। रास्ते में देरी हुई या कोई अनहोनी हुई तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? इस तरह का परियोजना पास कैसे हुई और इसके अभियंता कौन है और एमजीएम में पहले से ही एंबुलेंस व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अगर एंबुलेंस खराब स्थिति में खड़ी रहेंगी तो क्या गंभीर मरीजों को अपनी व्यवस्था से सीसीयू तक पहुंचना पड़ेगा?

सौरभ विष्णु ने मांग की कि नई सीसीयू के साथ ही 24 घंटे अत्याधुनिक इमरजेंसी, आईसीयू, बेहतर एंबुलेंस सेवा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और सभी जीवन रक्षक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मरीज को तत्काल इलाज मिल सके।

हॉस्पिटल का उद्देश्य मरीजों की जान बचाना है प्रशासन को मरीज हित में योजना की समीक्षा कर ठोस कदम उठाने होगा।

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Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।