
बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत में 14 वर्षीय किशोरी की हत्या के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश रचने वाले आरोपी ने ‘CID’ और ‘क्राइम पेट्रोल’ जैसे टीवी क्राइम शो देखकर पुलिस से बचने और सबूत मिटाने के तरीके तलाशे थे। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी को भी साजिश में शामिल किया। किशोरी की हत्या के बाद पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर तेजाब डाला गया और पेट्रोल छिड़ककर शव को जला दिया गया। इसके बाद शव को स्कूटी से दिल्ली से बागपत लाकर सुनसान जगह पर फेंक दिया गया।
हालांकि आरोपियों की यह पूरी योजना पुलिस की जांच के सामने ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। करीब 600 CCTV कैमरों की फुटेज और 2000 से अधिक वाहनों की जांच के बाद पुलिस उस स्कूटी तक पहुंची, जिसने पूरे हत्याकांड की कड़ियां जोड़ दीं। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस दिल्ली के एक किराये के मकान से होते हुए मथुरा में दर्ज किशोरी के अपहरण के पुराने मुकदमे तक पहुंच गई। इसके बाद पुलिस ने हाथरस से आरोपी अमन सागर और उसकी पत्नी रचना को गिरफ्तार कर लिया।
कब्रिस्तान की दीवार के पास मिला था अधजला शव
पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को बागपत में NH-709B दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के पास काठा गांव स्थित कब्रिस्तान की दीवार के नजदीक एक किशोरी का अधजला शव मिला था। शव की हालत बेहद खराब थी और चेहरे को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। ऐसे में उसकी पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।
शुरुआती जांच में पुलिस के हाथ ऐसा कोई सीधा सुराग नहीं लगा, जिससे हत्यारों तक पहुंचा जा सके। मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर नजर आ रहा था। इसके बाद बागपत के एसपी सूरज राय ने मामले की जांच के लिए SWAT टीम को लगाया।
600 CCTV कैमरे खंगाले, 2000 से ज्यादा वाहनों की जांच
पुलिस टीम ने शव मिलने वाली जगह तक पहुंचने और वहां से निकलने वाले संभावित रास्तों की जांच शुरू की। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर एक्सप्रेसवे और NH-709B के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
पुलिस के मुताबिक, टीम ने करीब 600 CCTV कैमरों की फुटेज देखी और 2000 से ज्यादा वाहनों की पड़ताल की। इसी दौरान एक स्कूटी पुलिस की नजर में आई। CCTV फुटेज में सामने आई इस स्कूटी ने जांच को नई दिशा दे दी।
दिल्ली के किराये के मकान तक पहुंची पुलिस
CCTV और सर्विलांस से मिली जानकारी को जोड़ते हुए जांच टीम दिल्ली के शास्त्री पार्क, जीरो पुश्ता और उस्मानपुरी इलाके तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, अमन सागर ने यहां एक मकान किराये पर लिया था और वह अपनी पत्नी रचना, दो साल की बेटी तथा 14 वर्षीय किशोरी परी के साथ रह रहा था।
जांच में पुलिस को पता चला कि 13 अगस्त को ही अमन ने यह मकान खाली कर दिया था। संयोग से इसी दिन बागपत में किशोरी का अधजला शव बरामद हुआ था। इस कड़ी के सामने आने के बाद पुलिस का शक अमन पर गहरा गया।
मथुरा की पुरानी FIR ने खोली किशोरी की पहचान
जांच के दौरान पुलिस को अमन सागर का मथुरा से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड मिला। पुलिस के मुताबिक, 17 अप्रैल 2026 को मथुरा के हाईवे थाने में 14 वर्षीय परी के अपहरण का मुकदमा अमन सागर के खिलाफ दर्ज हुआ था।
यहीं से पुलिस ने दिल्ली में अमन के साथ रह रही परी और बागपत में बरामद अधजले शव के बीच संबंध तलाशना शुरू किया। पुरानी FIR, CCTV फुटेज और सर्विलांस से मिले इनपुट को जोड़ने के बाद जांच टीम हाथरस पहुंची, जहां पुलिस ने अमन सागर और उसकी पत्नी रचना को गिरफ्तार कर लिया।
गला दबाकर हत्या, बोरे में शव डाल स्कूटी से बागपत ले गए
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि अमन और रचना ने कथित तौर पर किशोरी की गला दबाकर हत्या की। इसके बाद शव को बोरे में रखा गया और स्कूटी पर लादकर दिल्ली से निकल गए।
पुलिस का दावा है कि दोनों दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के रास्ते बागपत पहुंचे। काठा गांव के पास कब्रिस्तान की दीवार के नजदीक शव को फेंक दिया गया। पहचान छिपाने के लिए किशोरी के चेहरे पर तेजाब डाला गया और पेट्रोल डालकर शव में आग लगा दी गई। इसके बाद दोनों वहां से निकलकर हाथरस पहुंचे और एक किराये के मकान में रहने लगे।
कपड़ों की दुकान से शुरू हुई थी पहचान
पुलिस के अनुसार, अमन और रचना मथुरा में परी के घर के सामने कपड़ों की दुकान चलाते थे। इसी दौरान अमन की किशोरी से पहचान हुई। पुलिस का कहना है कि परी अमन की छोटी बेटी की देखभाल में मदद करती थी और इसी वजह से वह उसके साथ दिल्ली आई थी।
जांच के मुताबिक, बाद में अमन और परी के बीच कथित तौर पर नजदीकियां बढ़ गईं। इसे लेकर अमन और उसकी पत्नी के बीच विवाद होने लगा। पुलिस का दावा है कि इसी विवाद ने हत्या की साजिश की नींव रखी और दोनों ने मिलकर परी को रास्ते से हटाने का फैसला किया।
क्राइम शो देखकर पुलिस से बचने की कोशिश का आरोप
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात पुलिस के मुताबिक यह सामने आई कि आरोपी ने ‘CID’ और ‘क्राइम’ पेट्रोल जैसे टीवी क्राइम शो देखकर अपराध के बाद जांच से बचने के तरीके तलाशे थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शव को दूसरे जिले में ले जाने, चेहरे को तेजाब से खराब करने और शव जलाने जैसी कोशिशें इसलिए कीं, ताकि मृतका की पहचान न हो सके और पुलिस उन तक न पहुंच पाए। उन्हें उम्मीद थी कि अधजला शव मिलने के बाद पहचान करना मुश्किल होगा और मामला लंबे समय तक अनसुलझा रह सकता है।
एक छोटी-सी कड़ी ने खोल दी पूरी साजिश
आरोपियों ने अपराध के सबूत मिटाने और पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की, लेकिन CCTV कैमरों ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया। एक स्कूटी से शुरू हुई जांच दिल्ली के किराये के मकान तक पहुंची और फिर मथुरा में दर्ज पुरानी अपहरण की FIR ने किशोरी की पहचान और आरोपियों के बीच संबंध की अहम कड़ी सामने ला दी।
इस तरह 600 CCTV कैमरों की फुटेज, 2000 से ज्यादा वाहनों की जांच, सर्विलांस और पुराने मुकदमे की जानकारी को जोड़ते हुए पुलिस ने ब्लाइंड मर्डर का खुलासा कर दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।







