July 26, 2026

रिजल्ट नहीं आया और 700 व्याख्याता बहाल हो गये : 18 साल से कार्यरत आयोग के तत्कालीन सचिव रतिकांत झा ने शपथ पत्र देकर मामला उठाया था.

orig_origorigorigorig1587511601174666338317525322901784_1784934020.jpg


जेपीएससी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की सीआईडी ​​जांच चल रही है. लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं. इस बीच विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. दरअसल, 2008 में जेपीएससी ने 27 विषयों में 750 व्याख्याताओं की भर्ती परीक्षा आयोजित की थी. इनमें से 21 विषयों के नतीजे घोषित नहीं हुए, फिर भी 700 व्याख्याताओं की नियुक्ति हो गयी. ये सभी पिछले 18 साल से काम कर रहे हैं. इससे जेपीएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं पर सवाल खड़े हो गये हैं. इस संबंध में जेपीएससी के तत्कालीन सचिव सह परीक्षा नियंत्रक रतिकांत झा ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर यह मामला उठाया था. उन्होंने 18 नवंबर 2011 को दाखिल हलफनामे में कहा था कि 27 विषयों में 750 व्याख्याताओं की नियुक्ति होनी थी. इनमें से 21 विषयों के 700 से अधिक व्याख्याताओं की भर्ती परीक्षा के नतीजों को आयोग की बैठक में स्वीकार नहीं किया गया. आयोग के किसी भी सदस्य ने इस पर हस्ताक्षर भी नहीं किये थे। इतना ही नहीं कुल 750 पदों पर नियुक्ति के लिए कोई मेरिट लिस्ट भी जारी नहीं की गई. इस भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच निगरानी ब्यूरो को सौंपी गयी थी. फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई इसकी जांच कर रही है. आयोग की सहमति के बिना रिजल्ट जारी नहीं किया जा सकता. नियमों के मुताबिक किसी भी लोक सेवा आयोग में रिजल्ट चयन समिति या परीक्षा नियंत्रक की निगरानी में तैयार किया जाता है. इस नतीजे को आयोग की बैठक में मंजूरी के लिए रखा गया है. यह बैठक अध्यक्ष की अध्यक्षता में होती है, जिसमें सभी सदस्य भाग लेते हैं। आयोग की बैठक में नतीजों पर विचार किया जाता है. आयोग की मंजूरी और सदस्यों के हस्ताक्षर के बाद नतीजे जारी किये जाते हैं. इसके बाद नियुक्ति की अनुशंसा सरकार या विश्वविद्यालयों को भेजी जाती है. लेकिन बिना रिजल्ट जारी हुए यहां 750 व्याख्याताओं की नियुक्ति कैसे हो गयी, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है. हैरान करने वाले हैं ये बड़े सवाल… व्याख्याता नियुक्ति परिणाम को आयोग की बैठक में मंजूरी के लिए क्यों नहीं रखा गया? अगर आयोग ने मंजूरी नहीं दी तो उनकी नियुक्ति की अनुशंसा किस आधार पर की गयी? किस दस्तावेज के आधार पर राज्य विश्वविद्यालयों को नियुक्ति सूची भेजी गयी? जब व्याख्याताओं की मेधा सूची ही नहीं थी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राथमिकता कैसे निर्धारित कर दी? इधर, सीआईडी ​​की फिर छापेमारी, परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के तीन और कर्मचारी गिरफ्तार। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी ​​ने शुक्रवार को लगातार चौथे दिन सर्च ऑपरेशन चलाया. रांची पुलिस की मदद से दो होटलों में छापेमारी की गयी. इस दौरान परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड है। लिमिटेड (टीडीपीएल) के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार कर्मचारियों में हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार शामिल हैं. तीनों को शुक्रवार को विशेष सीआइडी कोर्ट में पेश किया गया. वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में होटवार जेल भेज दिया गया. इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या अब आठ हो गई है. पांचों आरोपी पांच दिन की रिमांड पर हैं। सीआइडी को पांचों आरोपियों की रिमांड मिल गयी है. कोर्ट ने उन्हें पांच दिनों तक पूछताछ की इजाजत दे दी है. उनसे शनिवार से पूछताछ शुरू होगी. इनमें जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ ​​अभय कुमार तिवारी, निदेशक रामवीर सिंह और दो कर्मचारी उस्मान और आबाद शामिल हैं.

Source link

ख़बर को शेयर करें।