रांची: दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक में भाग लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को झारखंड लौट आए। राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का जोरदार और भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर उनके साथ विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। एयरपोर्ट परिसर ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक आदिवासी नृत्य और लोक संगीत से गूंज उठा।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते कलाकारों और उत्साह से भरे कार्यकर्ताओं के कारण एयरपोर्ट परिसर उत्सव स्थल में तब्दील नजर आया।
मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावोस यात्रा को झारखंड के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद यह पहला मौका है, जब राज्य की नीतियों, संसाधनों और संभावनाओं को किसी वैश्विक मंच पर इतनी मजबूती और प्रभावी ढंग से रखा गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान झारखंड की पहचान जल, जंगल और जमीन की अवधारणा के साथ प्रस्तुत की गई। राज्य की खनिज संपदा, औद्योगिक संभावनाओं, निवेश के अवसरों और व्यापारिक माहौल को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष रखा गया, जिसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
उन्होंने कहा कि झारखंड में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देते हुए औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। दावोस में हुई बैठकों के दौरान कई वैश्विक कंपनियों और निवेशकों ने झारखंड में निवेश को लेकर रुचि दिखाई है, जिससे आने वाले समय में राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार, किसानों को बेहतर बाजार और आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के साथ विकास को आगे बढ़ाना है।









