Ishan Kishan: जब पूरा देश टीम इंडिया के टी20 वर्ल्ड चैंपियन बनने के जीत का जश्न मना रहा था, उसी समय ईशान किशन के परिवार पर गहरा दुख छाया हुआ था। एक तरफ ईशान अहम मुकाबला खेल रहे थे, तो दूसरी तरफ उनके पिता सैकड़ों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के एक मुर्दाघर में अपने परिजनों के शवों के पास खड़े थे।
दरअसल, शुक्रवार को ईशान किशन की चचेरी बहन और उनके पति की एक भीषण कार दुर्घटना में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यह हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की मौके पर ही जान चली गई। इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। हालांकि इस हादसे में दंपति के दो छोटे बच्चे चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गए। इनमें एक बच्चा 6 साल का है, जबकि दूसरा महज तीन महीने का है।
इस दुखद घटना की जानकारी देते हुए ईशान किशन के पिता प्रणव पांडे ने बताया कि परिवार इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत बड़ा अनर्थ हो गया है, हम लोग बहुत बड़ी मुसीबत में हैं। परिवार के लोग हादसे के बाद से ही शोक में डूबे हुए हैं और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में लगे हुए थे।
फाइनल मुकाबले की पूर्व संध्या पर इशान किशन के पिता सिलीगुड़ी के मुर्दाघर में मौजूद थे, जहां वे परिजनों के शवों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे थे। इतनी बड़ी पारिवारिक त्रासदी के बावजूद उन्होंने बेटे को मानसिक रूप से विचलित नहीं होने दिया और उसे मैच पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
इधर मैदान पर इशान किशन ने भी अपने निजी दुख को खेल पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने टीम के लिए जिम्मेदारी निभाते हुए शानदार बल्लेबाजी की और महज 25 गेंदों में 54 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में कई शानदार चौके और छक्के शामिल रहे, जिसने टीम इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
ईशान की यह पारी केवल एक खिलाड़ी के प्रदर्शन की कहानी नहीं थी, बल्कि यह उस मानसिक मजबूती की मिसाल भी थी, जिसमें निजी दुख को पीछे छोड़कर देश के लिए मैदान में सर्वश्रेष्ठ देना शामिल था। उनकी इस जुझारू पारी ने टीम इंडिया की जीत की राह आसान बनाई और फाइनल मुकाबले को यादगार बना दिया।
इतनी बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद मैदान पर ऐसा प्रदर्शन करना उनके मजबूत हौसले और पेशेवर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।














