पटना: सीएम नीतीश कुमार के पुराने साथी और सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी ने पार्टी छोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब एक दिन पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव जीतकर सुर्खियों में थे। त्यागी का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं और अटकलों को जन्म दे रहा है।
केसी त्यागी ने घोषणा की है कि वह 22 मार्च को पुराने साथियों और समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा, मैं पिछले 50 साल से नीतीश कुमार जी के साथ रहा हूं और उनके प्रति मेरे मन में सम्मान काम नहीं होगा।
केसी त्यागी पिछले कुछ समय से जेडीयू की सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी पार्टी सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया, जिससे उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई।
साल की शुरुआत में ही त्यागी कई मुद्दों को लेकर चर्चा में आ गए थे। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को हटाने के फैसले का विरोध किया था। इसके अलावा 2024 में फिलिस्तीन मुद्दे पर उन्होंने भारत सरकार की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाया, जिसने पार्टी के भीतर असहजता पैदा की। इन विवादों के बाद सितंबर 2024 में उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तब से ही उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती चली गई।
केसी त्यागी, जिनका पूरा नाम किशन चंद त्यागी है, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के रहने वाले हैं। उनका राजनीतिक जीवन करीब 50 वर्षों तक फैला हुआ है। उन्होंने 1989 में हापुड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा था। इसके अलावा वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं।
त्यागी जेडीयू के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। साल 2013 में उन्हें राज्यसभा सदस्य चुना गया था। साथ ही वे पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं और लंबे समय तक संगठन में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे।














