रांची: झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े बहुचर्चित टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने इस मामले में अपनी 5वीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करते हुए 14 और इंजीनियरों व अधिकारियों को आरोपी बनाया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इसके साथ ही इस केस में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।
ED द्वारा जिन नए आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें पूर्व मुख्य अभियंता सिंगराय टूटी, अजय कुमार, अजय तिर्की, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, राजकुमार टोप्पो, सिद्धांत कुमार अशोक कुमार गुप्ता और अनिल कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं। इसके अलावा सहायक अभियंता राम पुकार राम, रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) और पूर्व ईआईसी उमेश कुमार को भी आरोपी बनाया गया है।
यह पूरा घोटाला साल 2019 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसे जमशेदपुर के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने दर्ज किया था। यह मामला जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी से शुरू हुआ था। कार्रवाई के दौरान एसीबी ने जब जांच आगे बढ़ाई तो तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम के ठिकानों पर छापेमारी में 2.67 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने खुलासा किया कि वीरेंद्र कुमार राम ने ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के दौरान कमीशन के जरिए भारी संपत्ति अर्जित की। बताया गया कि इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ और पद का दुरुपयोग कर अवैध कमाई की गई। मामले की जांच आगे बढ़ने पर इसकी आंच ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक भी पहुंची। पिछले साल मई में ED ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के ओएसडी के सहयोगी के ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे। इस बरामदगी के बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। ईडी की चार्जशीट में उल्लेख किया गया कि टेंडर आवंटन में मंत्री स्तर तक कमीशन तय था। आरोप है कि मंत्री के हिस्से की राशि की वसूली उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल और अन्य सहयोगियों के माध्यम से की जाती थी।
जांच में सामने आया कि हर टेंडर पर करीब 3% तक कमीशन लिया जाता था। इस राशि का बंटवारा भी पहले से तय था।
करीब 1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री तक पहुंचता था
0.65% से 1% हिस्सा विभागीय सचिव को मिलता था
बाकी रकम चीफ इंजीनियर और अन्य अधिकारियों में बांटी जाती थी बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल निजी सचिव के जरिए संचालित किया जाता था। ED के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करीब 3048 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए। इनमें से 90 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई होने की आशंका जताई गई है।
अब तक ED इस केस में झारखंड, दिल्ली और बिहार समेत 52 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है। इस दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव लाल और अन्य सहयोगी शामिल हैं। एजेंसी ने लगभग 44 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं, जबकि करीब 38 करोड़ रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा 8 लग्जरी वाहनों को भी जब्त किया गया है।











