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रांची में अब प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से नहीं बढ़ा पाएंगे फीस, शुल्क निर्धारण के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन

On: March 20, 2026 11:07 PM
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रांची: राजधानी रांची में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत एक जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय समिति का गठन किया गया है। इस पहल का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत दिलाना और फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।

मनमानी फीस वृद्धि पर लगेगी रोक

नए प्रावधानों के लागू होने के बाद अब निजी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। निर्धारित मानकों से अधिक शुल्क वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ यह समिति जांच कर कार्रवाई करेगी। इससे अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से फीस वृद्धि को लेकर परेशान थे।

समिति में कौन-कौन शामिल

जिला प्रशासन द्वारा गठित इस कमिटी में प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र के कई अहम पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं:

अध्यक्ष: उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची
सदस्य: जिला शिक्षा पदाधिकारी
सदस्य: जिला शिक्षा अधीक्षक
सदस्य: जिला परिवहन पदाधिकारी
सदस्य: एक चार्टर्ड एकाउंटेंट
सदस्य: निजी स्कूलों के दो प्राचार्य (गुरूनानक सीनियर सेकेंडरी स्कूल और डीएवी कपिलदेव)
सदस्य: दिल्ली पब्लिक स्कूल, रांची और जेवीएम श्यामली के अभिभावक प्रतिनिधि

इसके अलावा जिले के सांसद और विधायक भी समिति का हिस्सा होंगे।

स्कूलों के लिए सख्त निर्देश

प्रशासन ने सभी निजी विद्यालयों को कई जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं

हर स्कूल में फीस निर्धारण कमिटी और अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य होगा
कमिटी की जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी
स्कूल परिसर में किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामान बेचने पर रोक रहेगी
किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए छात्रों या अभिभावकों को मजबूर नहीं किया जा सकेगा
स्कूल भवन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए ही होगा
कमिटी को मिले व्यापक अधिकार

जिला स्तरीय समिति को फीस से जुड़े मामलों की जांच के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं। यह समिति गवाहों को बुला सकती है, दस्तावेज मांग सकती है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय ले सकती है।

नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई

यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर ₹50 हजार से ₹2.5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता रद्द करने की भी कार्रवाई संभव है।

अभिभावकों के हित में बड़ा फैसला

जिला प्रशासन का यह कदम अभिभावकों के हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब अभिभावक अपनी शिकायतें सीधे जिला स्तरीय समिति के सामने रख सकेंगे, जिससे समस्याओं का समाधान आसान होगा।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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