झारखंड वार्ता संवाददाता
रांची/पतरातु । NTPC के पतरातु सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (PSTPP) में संचालित अस्पताल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में सामने आया है कि यह अस्पताल पिछले करीब 11 वर्षों से बिना वैध पंजीकरण और ड्रग लाइसेंस के संचालित हो रहा है।
आरटीआई के जवाब में केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने स्वीकार किया है कि अस्पताल का झारखंड राज्य नैदानिक प्रतिष्ठान (Clinical Establishment) पंजीकरण और ड्रग लाइसेंस अभी भी “प्रक्रिया में” है। जबकि यह अस्पताल वर्ष 2016 से लगातार संचालित हो रहा है। ऐसे में बिना वैधानिक अनुमति के मरीजों का इलाज किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फार्मेसी और कचरा प्रबंधन पर भी सवाल
आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है कि अस्पताल परिसर में संचालित फार्मेसी का भी अब तक कोई वैध लाइसेंस नहीं है। इससे दवाओं के भंडारण और वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल ने अपने नाम की जगह किसी अन्य लैब का सर्टिफिकेट इस्तेमाल किया है।
हजारों श्रमिकों के लिए मात्र एक डॉक्टर
प्रोजेक्ट में कार्यरत हजारों श्रमिकों की स्वास्थ्य व्यवस्था भी संदेह के घेरे में है। आरटीआई के अनुसार, वर्तमान में यहां केवल एक AFIH डिग्रीधारी डॉक्टर तैनात है। इतनी बड़ी संख्या में कामगारों के लिए यह व्यवस्था अपर्याप्त मानी जा रही है। सर्जन की नियुक्ति को लेकर जानकारी मांगी गई, लेकिन इसे “व्यावसायिक गोपनीयता” बताकर साझा नहीं किया गया।
जवाबदेही पर उठे सवाल
वर्तमान में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में डॉ. तन्मय मिश्रा कार्यरत हैं, लेकिन उन पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित रहने का आरोप है। बिना वैध पंजीकरण के हजारों श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
यह पूरा मामला Patratu स्थित इस बड़े प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आरटीआई कार्यकर्ता सतीश कुमार द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या एक महारत्न कंपनी के प्रोजेक्ट में स्वास्थ्य नियमों की इतनी बड़ी अनदेखी संभव है।
मुख्य सवाल
2016 से अब तक बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल कैसे चलता रहा?
फार्मेसी बिना लाइसेंस के क्यों संचालित हो रही है?
बायो-मेडिकल वेस्ट के दस्तावेजों में गड़बड़ी क्यों?
हजारों श्रमिकों के लिए पर्याप्त डॉक्टर क्यों नहीं?
मामले के सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।













