झारखंड वार्ता संवाददाता
गढ़वा। सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार की पहल पर आयोजित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के तहत बुधवार को अनुमंडल कार्यालय सभागार में सरस्वतिया नदी संरक्षण को लेकर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में शहर के दो दर्जन से अधिक प्रबुद्ध नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों, समाजसेवियों एवं जागरूक लोगों ने भाग लेकर नदी संरक्षण को लेकर अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान सरस्वतिया नदी की वर्तमान स्थिति, अतिक्रमण, गाद जमाव, कचरा प्रबंधन, जनसहभागिता एवं दीर्घकालिक संरक्षण की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते नदी संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह ऐतिहासिक धरोहर केवल स्मृति बनकर रह जाएगी।
पर्यावरण परिवार के अध्यक्ष एवं साहित्यकार विनोद पाठक ने कहा कि “आपन सरस्वतिया अभियान” को निरंतर चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नदी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर प्रत्येक क्षेत्र की जिम्मेदारी अलग टोली को सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि अभी भी नदी को बचाने का अवसर है और समाज के हर वर्ग को इसमें आगे आने की जरूरत है।
स्टूडेंट क्लब छठ पूजा समिति के विनोद जायसवाल ने नदी किनारे छोटे-छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पहले सरस्वतिया नदी में भी कोयल नदी जैसी बालू होती थी, लेकिन अब नदी कीचड़ और गाद से भर चुकी है। उन्होंने प्रत्येक रविवार को सामूहिक श्रमदान के माध्यम से नदी सफाई अभियान चलाने का सुझाव दिया।
नीरज श्रीधर स्वर्गीय ने नदी संरक्षण में जनप्रतिनिधियों की भूमिका तय करने पर जोर देते हुए कहा कि वार्ड पार्षदों एवं मुखियाओं को भी जवाबदेही के दायरे में लाना होगा। वहीं समाजसेवी दयाशंकर गुप्ता ने नदी में मांस एवं मछली के अवशेष फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
नगर परिषद वार्ड संख्या सात के पार्षद विनोद प्रसाद ने शमीम टेलर से जोड़ा पुल तक नदी क्षेत्र की निगरानी की जिम्मेदारी लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे अपनी टीम के साथ मिलकर नदी क्षेत्र को स्वच्छ रखने का प्रयास करेंगे।
धीरेंद्र द्विवेदी ने नदी किनारे सीमांकन हेतु पिलर लगाने का सुझाव दिया, जबकि अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने नदी के दोनों किनारों पर वृक्षारोपण एवं नगर परिषद की कचरा उठाव व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई।
युवा समाजसेवी चंदन जायसवाल ने प्लास्टिक प्रदूषण को नदी के लिए बड़ा खतरा बताते हुए नियंत्रण की मांग की। उन्होंने सुखवाना स्थित कचरा निस्तारण प्लांट को जल्द शुरू करने तथा तिलैया नदी में भी स्वच्छता अभियान चलाने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने अभियान में प्रयुक्त डीजल खर्च वहन करने की इच्छा जताई, जिस पर उपस्थित लोगों ने उनका आभार व्यक्त किया।
गढ़वा के चिकित्सक डॉ. टी. पीयूष ने कहा कि सरस्वतिया नदी को बचाने में प्रशासन प्रेरक की भूमिका निभा सकता है, लेकिन वास्तविक कार्य समाज को सामूहिक रूप से करना होगा। उन्होंने प्रभात फेरी, जनजागरूकता अभियान एवं स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम के दौरान नवोदित कवयित्री संध्या सुमन ने कविता के माध्यम से सरस्वतिया नदी की पीड़ा को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
अंत में एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरस्वतिया नदी गढ़वा शहर की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि “आपन सरस्वतिया अभियान” तब तक जारी रहेगा, जब तक नदी को पुनर्जीवित नहीं कर लिया जाता।
‘कॉफी विद एसडीएम’ में गूंजा सरस्वतिया नदी संरक्षण का मुद्दा; प्रबुद्ध नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों ने साझा किए सुझाव













