पटमदा:जर्जर सड़क और बदहाल एंबुलेंस व्यवस्था ने ली बुजुर्ग की जान,रास्ते में तोड़ा दम
पटमदा: पूर्वी सिंहभूम के पटमदा प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जोड़सा गांव निवासी 65 वर्षीय संतोष कुंभकार की शनिवार को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा और एंबुलेंस में आवश्यक इंतजाम होते तो उनकी जान बच सकती थी।
जानकारी के अनुसार, संतोष कुंभकार की तबीयत अचानक बिगड़ने पर दोपहर करीब 1:50 बजे उन्हें 108 एंबुलेंस से माचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था। अस्पताल तक पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर की जर्जर सड़क से गुजरना पड़ा। इसी दौरान एंबुलेंस का एक चक्का भी फट गया, हालांकि चालक वाहन को किसी तरह अस्पताल तक ले गया। लेकिन रास्ते में ही मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई और उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिजनों का कहना है कि मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी, लेकिन एंबुलेंस में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी। उनका आरोप है कि यदि एंबुलेंस पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम होती और आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं मौजूद रहतीं, तो शायद संतोष कुंभकार की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की मांग की है।
इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि 108 एंबुलेंस का संचालन रांची स्थित मुख्यालय से किया जाता है। उन्होंने कहा कि संबंधित एंबुलेंस को दो दिन पहले ही मरम्मत के बाद सीएचसी भेजा गया था।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और जर्जर सड़कों की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाती है। आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां सड़कें इतनी खराब हैं कि गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। संतोष कुंभकार की मौत ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के सामने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत को उजागर कर दिया है।
