
जमशेदपुर: झारखंड में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जमशेदपुर में तैयार की गई मतदाता सूची के मसौदे में तीन अफगान नागरिकों के नाम पाए गए हैं। मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
जिन तीन लोगों के नाम मतदाता सूची में पाए गए हैं, उनकी पहचान आसिल खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहिम के रूप में हुई है। बताया गया है कि तीनों के नाम पहले से ही मतदाता सूची में दर्ज थे। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उन्होंने जनगणना संबंधी प्रक्रिया भी पूरी की थी।
एसआईआर के तहत चल रहे दस्तावेज सत्यापन के दौरान तीनों के कागजात में कुछ विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद उनके नाम नोटिस सूची में डाल दिए गए और संबंधित अधिकारियों की ओर से उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया।
हालांकि, नोटिस के बावजूद तीनों व्यक्ति मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की आगे जांच की। सत्यापन के दौरान उनके पासपोर्ट मिलने पर यह खुलासा हुआ कि तीनों अफगानिस्तान के नागरिक हैं।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि इन तीनों व्यक्तियों के अलावा इनके परिवार के कौन-कौन से सदस्य मतदाता सूची में दर्ज हैं और इनके नाम किस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में शामिल हुए थे।
इस संबंध में जमशेदपुर के डीसी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य में फिलहाल एसआईआर के तहत दावा और आपत्ति की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने या बनाए रखने के लिए प्रस्तुत किए जा रहे दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि किसी भी गैर-भारतीय नागरिक को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। यदि कोई विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच में अफगान नागरिक पाए गए तीनों व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि उनके नाम मतदाता सूची में कब और किस आधार पर शामिल किए गए तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज हैं या नहीं।
एसआईआर के दौरान सामने आए इस मामले ने मतदाता सूची के सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चुनाव आयोग की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तीनों विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में किस स्तर पर और कैसे दर्ज हुए।







