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पलामू: पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) को सुरक्षित रखने और ट्रेनों की चपेट में आने वाले वन्यजीवों की जान बचाने के लिए रेलवे ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। रेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने मौजूदा रेलवे लाइन को टाइगर रिजर्व के कोर जोन से बाहर स्थानांतरित करने का विस्तृत प्रस्ताव भारत सरकार के ‘परिवेश’ पोर्टल पर आधिकारिक रूप से प्रस्तुत कर दिया है।
प्रस्तावित वैकल्पिक रेलवे अलाइनमेंट का उद्देश्य संवेदनशील वन क्षेत्र में रेलवे परिचालन से वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है। नई व्यवस्था से पलामू टाइगर रिजर्व में हाथी और बाघ जैसे वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और उनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
नई रेलवे लाइन को लेकर हेहेगरा और छिपादोहर रेलवे स्टेशनों के बंद या ध्वस्त किए जाने की खबरों को रेलवे ने निराधार बताया है। रेलवे के मुताबिक यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दोनों स्टेशनों को मौजूदा स्थान से करीब 500 मीटर की दूरी पर नए और आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा।
नए स्टेशनों पर यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें आधुनिक यात्री सुविधाएं और उन्नत प्रतीक्षालय जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ इस क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय विकास और स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन के विशेष अनुरोध पर रेलवे ने इस रूट पर एक अतिरिक्त रेलवे स्टेशन बनाने की मांग को भी मंजूरी दी है। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
इस पूरी परियोजना का सबसे अहम हिस्सा बेतला के आसपास स्थित संवेदनशील ‘चिकन नेक’ वन्यजीव गलियारा है। यह क्षेत्र हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को बाधित होने से बचाने के लिए यहां आधुनिक तकनीक से हाईटेक सुरंग बनाने की योजना है।
सुरंग का निर्माण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून की तकनीकी देखरेख और मार्गदर्शन में किया जाएगा। आधुनिक टनलिंग तकनीक के जरिए रेलवे लाइन को जमीन के नीचे से गुजारा जाएगा, जिससे सतह पर बड़े पैमाने पर खुदाई या निर्माण की आवश्यकता नहीं होगी।
परियोजना की खास बात यह है कि सुरंग के ऊपर मौजूद जंगल और वन्यजीवों के पारंपरिक कॉरिडोर को यथासंभव सुरक्षित रखा जाएगा। इससे हाथियों, बाघों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही पर रेलवे लाइन का असर कम करने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही आसपास के ग्रामीण इलाकों और मानव बस्तियों को विस्थापित किए बिना रेलवे लाइन को भूमिगत मार्ग से ले जाने की योजना है। इससे एक ओर वन क्षेत्र और वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय आबादी को भी बड़े पैमाने पर विस्थापन का सामना नहीं करना पड़ेगा।





