
झारखंड वार्ता
श्री बंशीधर नगर (गढ़वा)। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को श्री बंशीधर नगर अनुमंडल मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में आस्था और भक्ति का माहौल छा गया। श्रद्धालुओं ने देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की श्रद्धा, भक्ति और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
सुबह से ही नगर के प्रमुख पूजा पंडालों में भक्तों का आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। शहर के सब्जी बाजार स्थित जय भामा शाह क्लब, भवनाथपुर मोड़ स्थित बजरंग सेवा समिति,जंगीपुर पेट्रोल पंप स्थित गायत्री शक्तिपीठ, नव युवक किसान क्लब, मुख्य बाजार दुर्गा पूजा समिति आदि के पंडालों में भक्त आने लगे है। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ पूजा में हिस्सा लिया। शाम होते-होते पंडालों और मंदिरों में दीप प्रज्वलन के साथ सामूहिक आरती हुई। आरती के दौरान भक्तजन “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण गूंजायमान कर रहे थे।
नवरात्र का दूसरा दिन होने के कारण घरों में भी भक्तों ने विशेष पूजन किया। परिवारों ने मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाया तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। घर-घर से धूप-दीप और मंत्रोच्चारण की गूंज सुनाई दी।
कर्मकांडी पंडित सोमेश्वर तिवारी ने बताया कि मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जिन्हें तप की चारिणी कहा जाता है। इनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। इनकी आराधना से भक्तों को भयमुक्त जीवन, सुख, आरोग्य, मनोबल और साधना की सफलता मिलती है। नवरात्र के इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित होता है, जिससे साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।
आज मां चंद्रघंटा की पूजा
मंगलवार को नवरात्र का तीसरा दिन है, जो मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिस कारण उन्हें यह नाम मिला। उनका वाहन सिंह है और उनके दस भुजाओं में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के जीवन में शांति, साहस और समृद्धि आती है। परिवारिक कल्याण और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद भी मिलता है।






