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झारखंड राज्यसभा चुनाव में बैजनाथ राम और परिमल नथवानी विजयी, कांग्रेस को लगा बड़ा झटका

On: June 18, 2026 7:25 PM
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झारखंड वार्ता संवाददाता

रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणाम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। कड़े मुकाबले के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत दर्ज कर राज्यसभा का टिकट हासिल कर लिया। चुनाव परिणाम के साथ ही पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक सस्पेंस भी समाप्त हो गया।

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सर्वाधिक 31 मत प्राप्त हुए, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को 30 वोट मिले। हालांकि दो मत अमान्य घोषित होने के बाद उन्हें 28 वैध मत मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 20 वोट प्राप्त हुए, जिनमें एक मत रद्द हो गया। अंतिम गणना में बैजनाथ राम 31 और परिमल नथवानी 28 वैध मतों के साथ विजयी घोषित किए गए।

चुनाव परिणाम ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं ने दोनों सीटों पर जीत का दावा किया था और क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार किया था। लेकिन नतीजों ने संकेत दिया कि गठबंधन के भीतर कहीं न कहीं असंतोष या रणनीतिक चूक रही, जिसका खामियाजा कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को भुगतना पड़ा।

परिमल नथवानी की जीत को राजनीतिक हलकों में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े नथवानी इससे पहले भी दो बार झारखंड से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में यह उनकी लगातार तीसरी जीत है, जिसने उनकी राजनीतिक पकड़ को एक बार फिर साबित कर दिया है।

वहीं झामुमो के विजयी उम्मीदवार बैजनाथ राम का राजनीतिक सफर भी काफी संघर्षपूर्ण रहा है। शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने वाले बैजनाथ राम ने झारखंड गठन के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा। जदयू, भाजपा और झामुमो जैसे दलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद अब उन्होंने राज्यसभा पहुंचकर अपने राजनीतिक जीवन में एक नई उपलब्धि जोड़ ली है।

राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड की राजनीति में कई नए संकेत दिए हैं। एक ओर झामुमो अपनी सीट बचाने में सफल रही, वहीं दूसरी ओर परिमल नथवानी की जीत ने महागठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन परिणामों का असर राज्य की राजनीति और गठबंधन की दिशा पर साफ दिखाई दे सकता है।

Shubham Jaiswal

“मैं शुभम जायसवाल, बीते आठ वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने विभिन्न प्रतिष्ठित अखबारों और समाचार चैनलों में प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले पाँच वर्षों से मैं साप्ताहिक अखबार ‘झारखंड वार्ता’ से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ। पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं बल्कि समाज और जनता के प्रति एक जिम्मेदारी है, जहाँ मेरी कलम हमेशा सच और न्याय के पक्ष में चलती है।

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