{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{"ai_enhance":1,"transform":1},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":true,"containsFTESticker":false}
रांची: नामकुम अंचल में जमीन से जुड़े राजस्व दस्तावेज और म्यूटेशन रिकॉर्ड गायब होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने दायर अवमानना याचिका को निष्पादित करते हुए बंद कर दिया है। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर बताया गया कि अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में मामले में नियमित प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एसीबी की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद अदालत ने जवाब पर संतोष जताया और अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी।
एसीबी की ओर से दर्ज प्राथमिकी में नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) श्वेता वर्मा, अंचल निरीक्षक (CI) मनोज कुमार और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान एसीबी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि मामले में पहले कैबिनेट सेक्रेटरी से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी। इसके बाद प्रारंभिक जांच (PE) कराई गई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि अंचल कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से राजस्व दस्तावेजों में हेराफेरी की गई और रिकॉर्ड गायब किए गए। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने नियमित FIR दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह मामला जमीन के दस्तावेज से जुड़ा है। प्रार्थी थॉमस साइमन सायरिल हंस ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनकी नामकुम अंचल स्थित जमीन से संबंधित म्यूटेशन रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के लिए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया था।
प्रार्थी के मुताबिक, अदालत के आदेश के बावजूद अंचल कार्यालय की ओर से संबंधित राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बजाय कार्यालय की ओर से रिकॉर्ड के गायब होने का हवाला दिया जाता रहा। इससे अदालत के आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठे और प्रार्थी को अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी ने प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड के रखरखाव और उसके गायब होने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई। एसीबी ने अदालत को बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया अंचल के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों में हेराफेरी तथा रिकॉर्ड गायब किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद मामले को प्रारंभिक जांच तक सीमित न रखते हुए नियमित प्राथमिकी दर्ज की गई। FIR में तत्कालीन CO, CI और लिपिक को आरोपी बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान एसीबी ने शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को पूरी कार्रवाई की जानकारी दी। अदालत को बताया गया कि पूर्व आदेश के अनुरूप FIR दर्ज कर दी गई है और मामले में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। एसीबी के जवाब से संतुष्ट होने के बाद जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने अवमानना याचिका को निष्पादित करते हुए बंद कर दिया। हालांकि, FIR दर्ज होने के बाद अब मामले की आगे की जांच और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।





