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आदिवासी सेंगेल अभियान के संस्थापक सालखन मुर्मू का 74 वां जन्मदिन मना

On: June 2, 2026 8:36 PM
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चास:चास प्रखंड के अन्तर्गत कनारी पंचायत के बरुआटांड़ में आदिवासी सेंगेल अभियान के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू का 2 जून 2026 को 74 वां जन्मदिन मनाया गया। मुर्मू साहब का जन्म 2 जून 1952 को तत्कालीन बिहार (वर्तमान झारखंड) के सिंहभूम क्षेत्र करनडीह,बोदराटोला, जमेशेदपुर में एक संताल आदिवासी परिवार में हुआ था।सभी सेंगेल के कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर दीया जलाकर और पुष्प अर्पित किया एवं लंम्बी आयु के लिए दीर्घायु एवं शुभकामनाएं दी।

इस शुभ अवसर पर सेंगेल के बोकारो जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू ने कहा कि सालखन मुर्मू एक राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं,जो आदिवासी अधिकारों और मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं। वे 1998 में,12 वीं एवं 13 वीं लोकसभा में उड़िसा के मयूरभंज निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा से सांसद चुने गये थे।
मुर्मू ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उनके विकास के लिए निरंतर काम किया है और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय राजनीति में आदिवासी समुदाय की आवाज को मजबूत करने प्रयास किया है। सालखन मुर्मू की राजनीति यात्रा और उनके प्रयासों ने आदिवासी मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में वे आदिवासी सेंगेल अभियान सामाजिक संगठन के बैनर तले आदिवासी अधिकारों और हितों की रक्षार्थ आंदोलनरत हैं। फिलहाल संताली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा और सरना धर्म कोड की मान्यता को लेकर संघर्षरत हैं।

आगे जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू ने कहा कि बारहवीं एवं तेरहवीं (1998-2004) लोकसभा में जब सांसद निर्वाचित हुए तब उन्होंने संसद (लोकसभा) में आदिवासी हितों एवं अधिकारों के लिए जिस प्रमुखता के साथ अपनी बुलंद आवाज रखते थे,आज ऐसे आदिवासी नेता विरले ही मिलते हैं। उनका नेतृत्व क्षमता का परिणाम ही है कि उन्होंने 22 दिसंबर 2003 को संविधान के आठवीं अनुसूची में संताली भाषा को शामिल कराने में सफल रहे। साथ ही झारखंड राज्य के अमर शहीद सिदो मुर्मू कान्हू मुर्मू के डाक टिकट 6 अप्रैल 2002 को केंद्र सरकार द्वारा जारी कराने में भी सफल रहे। शहीद सिदो मुर्मू कान्हू मुर्मू के डाक टिकट जारी करवा कर श्री मुर्मू ने अमर शहीद सिदो मुर्मू को फिर से पुनर्जीवित किया। और उनके अथक प्रयास के बदौलत ही झारखंड प्रदेश में पेसा के तहत 32 साल के बाद सुप्रीम कोर्ट से जीतकर झारखंड में पंचायत चुनाव करने के झारखंड सरकार को मजबूर किया।
उन्होंने आदिवासी भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों के लिए लगातार संघर्ष किया। विशेष रूप से छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNt act) और संताल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT act) में प्रस्तावित संशोधनों का उन्होंने जोरदार विरोध किया।

इस जन्मदिन के शुभ अवसर पर निम्न मांग किया गया:-

1. संताली भाषा को झारखंड में अनुच्छेद,-345 के तहत अविलंब प्रथम राजभाषा का दर्जा दिया जाए।
2. 2027 की जनगणना में आदिवासीयों प्रकृति पूजक सरना धर्म कोड लागू किया जाए।
3. गिरीडीह जिला में स्थित मरांग बुरु (पारसनाथ पहाड़) को जैनों के कब्जे से आदिवासीयों को वापस किया जाए।
4. माझी परगना स्वाशासन व्यवस्था में सुधार कर संविधान कानून लागू किया जाए।

इस अवसर पर सेंगेल अभियान के झारखंड प्रदेश संयोजक सह बोकारो जोनल परगना करमचंद हांसदा,सेंगेल टावर कृष्णा किस्कू,बिंतोष टुडू, पीतांबर सोरेन,नकुल सोरेन, रोहित किस्कू, सावित्री मुर्मू, लतिका मुर्मू, दिनेश सोरेन,अभय हेम्बरम, सुजाता हेम्बरम, मीरा सोरेन,सुजल मुर्मू आदि लोग मौजूद थे।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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