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एसआईपी में निवेश तो बढ़ा, पर रजिस्ट्रेशन के रुझान जता रहे निवेशकों की सतर्कता

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रांची: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) छोटे और मध्यम निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड के जरिए दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का प्रमुख माध्यम बना हुआ है। रांची में एसआईपी रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मार्च 2026 में 0.68 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल 2026 में 0.69 प्रतिशत हो गई। यह दर्शाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

हालांकि, उद्योग स्तर पर नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन में गिरावट और एसआईपी बंद होने की संख्या में बढ़ोतरी निवेशकों की बढ़ती सतर्कता की ओर इशारा करती है। अप्रैल 2026 में नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन 50.71 लाख के 12 महीने के निचले स्तर पर आ गए, जबकि बंद होने वाले खाते 51.29 लाख तक पहुंच गए। इससे एसआईपी स्टॉपेज रेशियो 101 प्रतिशत पर रहा। वहीं, एसआईपी के जरिए निवेश लगभग 30,000 करोड़ रुपये के आसपास स्थिर बना रहा। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक अब अधिक सतर्क होकर निर्णय ले रहे हैं, लेकिन लंबी अवधि में अनुशासित निवेश ही बेहतर परिणाम देता है।

टाटा एसेट मैनेजमेंट के एमडी और सीईओ प्रथित भोबे ने कहा, ‘निवेश में उतार-चढ़ाव आना तय है, लेकिन उस पर तुरंत प्रतिक्रिया देना निवेशक के हाथ में है। हमारा मानना है कि लंबी अवधि का मुनाफा बाजार की चाल से नहीं, बल्कि निवेशक के व्यवहार से तय होता है। नियमित एसआईपी निवेश और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।’

जानकारों का मानना है कि एसआईपी अब केवल निवेश का साधन नहीं बल्कि एक सतर्क और रणनीतिक वित्तीय योजना का हिस्सा बनता जा रहा है।

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Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।