
रांची: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राज्यवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं के साथ-साथ राज्य के छात्र-युवाओं के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। खास तौर पर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों, नियुक्ति प्रक्रिया और युवाओं के भरोसे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के लाखों युवा अपने बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनकी मेहनत और सपनों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि किसी माफिया, भ्रष्टाचार तंत्र या परीक्षा में अनियमितता के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
युवाओं को सीएम का भरोसा- मेहनत बेकार नहीं जाएगी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की विरासत राज्य को पहचान देती है और यहां के युवा उस पहचान को भविष्य की दिशा देते हैं। उन्होंने युवाओं से सरकार पर विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और उसका परिणाम व्यर्थ नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।
JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी पर बोले सीएम
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल दोषियों को गिरफ्तार कर लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जरूरत ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी के सपनों के साथ खिलवाड़ की गुंजाइश न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का प्रभाव या रसूख उसे कार्रवाई से नहीं बचा सकता। हालांकि, मुख्यमंत्री ने बिना सबूत किसी को दोषी ठहराने से भी बचने की बात कही।
उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुधार की बात कही। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार समयबद्ध परीक्षा वार्षिक कैलेंडर जारी करने, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने और तकनीकी रूप से सुरक्षित सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं केवल झारखंड तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। बावजूद इसके, राज्य सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है और युवाओं के भविष्य तथा उनके विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
रोजगार को लेकर सरकार की बड़ी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी विभागों में खाली पदों को भरना नहीं है, बल्कि रोजगार के व्यापक अवसर तैयार करना भी है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उद्योग, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार ऐसा झारखंड बनाने की दिशा में काम कर रही है, जहां युवा सरकारी नौकरी के साथ-साथ निजी क्षेत्र, उद्यमिता और स्वरोजगार के माध्यम से भी आगे बढ़ सकें।
शिक्षा, तकनीक और उद्यमिता पर जोर
सीएम ने कहा कि झारखंड के युवाओं को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता से जोड़ना जरूरी है। राज्य की प्रगति में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं होगी, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर एवं सतत उपयोग से भी बनेगी।
उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लाह, तसर, बांस, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज जैसे स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ने की बात कही। इसके लिए वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग पर जोर दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी हो सके।
आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच सीएम का संदेश अहम
गौरतलब है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर छात्र संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे समय में स्वतंत्रता दिवस के मंच से मुख्यमंत्री का परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर दिया गया भरोसा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार परीक्षा प्रणाली में ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिस पर अभ्यर्थियों को भरोसा हो और समाज को उसकी पारदर्शिता पर विश्वास हो। उन्होंने युवाओं से धैर्य बनाए रखने और अपनी मेहनत पर भरोसा रखने की अपील की।
अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि स्वतंत्रता दिवस के मंच से मुख्यमंत्री की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार, वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पारदर्शिता और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली को लेकर किए गए वादों को सरकार किस तरह धरातल पर उतारती है।





