---Advertisement---

डंडा प्रखंड व मझिआंव नगर पंचायत की मान्यता बरकरार रखने की मांग, मिथिलेश ठाकुर ने CM को सौंपा ज्ञापन

On: March 7, 2026 7:31 PM
---Advertisement---

गढ़वा: जिले के डंडा प्रखंड सह अंचल की संभावित समाप्ति को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री और झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर डंडा प्रखंड एवं मझिआंव नगर पंचायत की मान्यता को यथावत रखने की मांग की है।

पूर्व मंत्री ने अपने ज्ञापन में गढ़वा जिले के ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह जिला आजादी के बाद लंबे समय तक अपनी पहचान के लिए संघर्ष करता रहा। आखिरकार वर्ष 1991 में इसे पलामू जिले से अलग कर स्वतंत्र जिला बनाया गया। इसके बाद झारखंड राज्य गठन के बाद प्रशासनिक सुविधा और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कई प्रखंडों का पुनर्गठन किया गया। इसी प्रक्रिया के तहत वर्ष 2008 में डंडा प्रखंड का गठन किया गया था, ताकि क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक सेवाएं उनके नजदीक मिल सकें।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डंडा प्रखंड का उद्घाटन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुआ था, जिससे इस प्रखंड का राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व भी जुड़ा हुआ है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि डंडा प्रखंड मुख्यालय गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इस क्षेत्र में आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, दलित, किसान और मजदूर समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। प्रखंड और अंचल कार्यालय इन लोगों के लिए आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी कार्य, पेंशन, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सहित कई सरकारी सेवाओं का प्रमुख केंद्र हैं।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि डंडा प्रखंड की मान्यता समाप्त कर दी जाती है तो क्षेत्र की जनता को अपने जरूरी कामों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों का सहारा लेना पड़ेगा। इससे लोगों को समय, धन और श्रम की अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ेगी। उनके मुताबिक प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी डंडा प्रखंड को समाप्त करना व्यावहारिक नहीं है और यह फैसला जनहित के खिलाफ होगा।

मिथिलेश ठाकुर ने यह भी कहा कि गढ़वा जिला प्रशासन द्वारा डंडा प्रखंड सह अंचल और मझिआंव नगर पंचायत की मान्यता समाप्त करने से संबंधित पत्र मुख्य सचिव को भेजा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस प्रस्ताव को निरस्त करते हुए दोनों इकाइयों की मान्यता को पहले की तरह बरकरार रखने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया जाए।

उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर डंडा प्रखंड के पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने उनसे मुलाकात कर अपनी चिंता जाहिर की थी। लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की थी। अब एक बार फिर उन्होंने ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र के हित में सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

Join WhatsApp

Join Now