
रामगढ़/कुज्जू:रामगढ़ के कुज्जू क्षेत्र में रविवार दोपहर एक बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट की नंबर-1 फर्नेस में अचानक तेज धमाका होने से अफरा-तफरी मच गई। भट्टी से निकले गर्म धातु और मलबे की चपेट में आकर करीब 10 मजदूर झुलस गए। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि पूरे प्लांट परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
घटना के तुरंत बाद प्लांट प्रबंधन ने घायलों को रांची रोड स्थित होप अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद 7 मजदूरों की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया गया।
घायलों में विजय, राजेंद्र महतो, परमेश्वर महतो, कुंज लाल, रमेश, रितेश, संजय और मोनू समेत अन्य मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं।
फर्नेस में धमाके से मची अफरा-तफरी
बताया जा रहा है कि रविवार दोपहर करीब एक बजे मजदूर फर्नेस के आसपास काम कर रहे थे। इसी दौरान नंबर-1 फर्नेस में अचानक तेज धमाका हुआ। देखते ही देखते गर्म धातु और मलबे के टुकड़े आसपास फैल गए। मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई लोग इसकी चपेट में आकर झुलस गए।
हादसे के बाद प्लांट में कुछ देर के लिए कामकाज प्रभावित रहा। घटना की सूचना मिलते ही प्रबंधन की ओर से घायलों को अस्पताल भेजने की कवायद शुरू की गई।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
हादसे के बाद प्लांट में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरों का आरोप है कि गर्म भट्टी जैसे संवेदनशील स्थान पर काम करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते।
मजदूरों के अनुसार, कई कर्मचारियों को हेलमेट, सेफ्टी शूज और आग से बचाव वाले सुरक्षा परिधान जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिलतीं। उनका यह भी आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवाज उठाने पर नौकरी जाने का डर बना रहता है।
पहले भी सामने आते रहे हैं सुरक्षा से जुड़े सवाल
श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट में हुए इस हादसे के बाद अब पुराने सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मजदूरों का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है, लेकिन इसकी निगरानी कितनी गंभीरता से हो रही है, यह जांच का विषय है।
हादसे ने श्रम विभाग और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि घटना की आधिकारिक जांच में फर्नेस ब्लास्ट की वजह क्या सामने आती है और क्या प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।
फिलहाल चार मजदूरों को रांची रेफर किए जाने के बाद उनकी स्थिति पर नजर बनी हुई है। हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




