
रांची: राजधानी रांची में इन दिनों लेप्टोस्पायरोसिस यानी रैट फीवर तेजी से पांव पसार रहा है। चूहों से फैलने वाली इस बीमारी से एक महीने के दौरान रांची के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़ित 130 से अधिक मरीजों को भर्ती कराया गया है। इनमें बच्चों की संख्या अधिक बताई जा रही है। हालांकि, मरीजों की संख्या से संबंधित इन आंकड़ों की स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चिकित्सकों के अनुसार, संक्रमण के मामलों में बच्चों की संख्या विशेष रूप से अधिक दिखाई दे रही है। 5 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों में लेप्टोस्पायरोसिस का संक्रमण अधिक देखे जाने की बात कही जा रही है। चिकित्सकों का मानना है कि बारिश के मौसम में जलजमाव और दूषित पानी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
रैंक फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) एक जीवाणुजनित संक्रमण है, जो लेप्टोस्पाइरा नामक जीवाणु के कारण होता है। यह बीमारी मुख्य रूप से चूहों और अन्य संक्रमित जानवरों के मल-मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से मनुष्यों तक पहुंच सकती है। बारिश के दौरान जब जलजमाव होता है, तो संक्रमित जानवरों के मल-मूत्र में मौजूद जीवाणु पानी के साथ आसपास के क्षेत्रों में फैल सकते हैं। ऐसे दूषित पानी के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि वे जलजमाव वाले स्थानों में खेलने या वहां जमा पानी के संपर्क में आने से संक्रमित हो सकते हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक, दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने के दौरान लेप्टोस्पाइरा जीवाणु शरीर में प्रवेश कर सकता है। त्वचा पर मौजूद छोटे कट, खरोंच या घाव इसके प्रवेश का माध्यम बन सकते हैं। आंख, नाक या मुंह जैसे शरीर के संवेदनशील हिस्सों के संपर्क से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। अभिभावकों को बच्चों को जलजमाव वाले स्थानों, गंदे पानी और संदिग्ध रूप से दूषित मिट्टी में खेलने से रोकना चाहिए। बारिश के मौसम में साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण व्यक्ति और संक्रमण की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्य तौर पर इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा त्वचा पर चकत्ते शामिल हो सकते हैं। कुछ मरीजों में लसीका ग्रंथियों में सूजन भी देखी जा सकती है। उपचार में एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है।
कई बार शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार या अन्य संक्रमण जैसे दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद लगातार बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।




