नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट से जुड़े एक चर्चित अवमानना मामले में अहम आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड के अधिवक्ता महेश तिवारी को निर्देश दिया है कि वे झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगें। यह मामला अदालत की कार्यवाही से जुड़ी उस वायरल वीडियो क्लिप से संबंधित है, जिसमें वकील कथित तौर पर हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश से कहते हुए नजर आए थे, डोंट क्रॉस द लिमिट (Don’t cross the limit)।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में दायर याचिका का निपटारा करते हुए अधिवक्ता को राहत देते हुए यह स्वतंत्रता दी कि वे हाईकोर्ट की उस पांच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष माफीनामा दाखिल कर सकते हैं, जिसने पिछले वर्ष अक्टूबर में उनके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।
हाईकोर्ट से ‘सहानुभूतिपूर्वक’ विचार का अनुरोध
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में झारखंड हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि यदि वकील बिना शर्त माफी मांगते हैं, तो उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालतों में शिष्टाचार और मर्यादा बनाए रखना अधिवक्ताओं की पेशेवर जिम्मेदारी है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर 2025 का है। उस दिन झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस राजेश कुमार के समक्ष एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। मामला बिजली कनेक्शन की बहाली से जुड़ा था, जिसमें अधिवक्ता महेश तिवारी अपने मुवक्किल की ओर से पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान वकील ने बकाया राशि के एवज में 25,000 रुपये जमा करने की पेशकश की, लेकिन अदालत ने पूर्व नजीरों (precedents) का हवाला देते हुए बकाया का 50 प्रतिशत जमा करने की शर्त रखी। अंततः मामला 50,000 रुपये जमा करने पर सुलझ गया, लेकिन इसके बाद अदालत में हुई बहस ने तूल पकड़ लिया।
जज की टिप्पणी के बाद बढ़ा तनाव
सुनवाई के बाद जस्टिस राजेश कुमार ने वकील के बहस करने के तरीके पर नाराजगी जताई और झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष से उनके आचरण पर संज्ञान लेने को कहा। इसके जवाब में अधिवक्ता ने कथित तौर पर कहा कि वे अपने तरीके से बहस करेंगे और न्यायाधीश से कहा, ‘डोंट क्राॅस द लिमिट’।
इस पूरी कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश और चार अन्य जजों की पांच-सदस्यीय पीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिवक्ता को अवमानना नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें रखी गईं?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि उनके मुवक्किल अपने व्यवहार को लेकर अत्यंत पश्चातापी हैं और बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वकील का उद्देश्य न्यायालय का अपमान करना या न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना नहीं था।
सीजेआई की सख्त टिप्पणी
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने वकील के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी भी जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह का अड़ियल रवैया स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा,
‘वह जजों के सामने यह बात क्यों नहीं कह सकते? यह उनका अड़ियल चरित्र है। अगर वे आंखें दिखाना चाहते हैं तो दिखाने दीजिए, हम जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है।’
वहीं जस्टिस जोयमाल्य बागची ने अदालतों में गिरते अदालती शिष्टाचार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के हर स्तर पर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां अनावश्यक टकराव को पेशेवर गर्व का विषय बना लिया जाता है।
राहत के साथ चेतावनी
शीर्ष अदालत ने इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने पश्चाताप व्यक्त किया है, उन्हें अवमानना नोटिस का जवाब देने और हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि अदालत की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।










