झारखंड वार्ता संवाददाता
वैशाली: बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अपराध चाहे जितना पुराना हो, कानून का शिकंजा एक दिन जरूर कसता है। करीब 33 साल पुराने हत्या के प्रयास मामले में अदालत ने 84 वर्षीय बुजुर्ग को दोषी करार दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार वैशाली जिले के राघवपुर गांव का यह मामला वर्ष 1992 का है। बताया जाता है कि 10 नवंबर 1992 की सुबह अदालत राय अपनी पत्नी रामशकी देवी के साथ घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान गांव के दीप राय अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वहां पहुंचे और रास्ते पर कांच के टुकड़े बिछाने लगे। विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि इस दौरान अदालत राय और उनकी पत्नी पर जानलेवा हमला किया गया।
घटना के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने 13 मार्च 1993 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चलती रही। वर्ष 1999 में अदालत ने आरोप तय किए तथा मामले में कुल 10 गवाहों की गवाही दर्ज की गई।
लंबे न्यायिक संघर्ष के दौरान इस मामले से जुड़े चार आरोपियों की मौत हो चुकी है। वहीं, बचे हुए आरोपी 84 वर्षीय दीप राय को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148 और 307 के तहत दोषी करार दिया है।
बताया जा रहा है कि आरोपी अब शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चुके हैं और बिना सहारे ठीक से चल-फिर भी नहीं पाते। इसके बावजूद उन्हें अदालत के आदेश पर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
अपर लोक अभियोजक के अनुसार मामले में सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 2 जून की तारीख निर्धारित की गई है। यह मामला एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि कानून की नजर में अपराध की कोई समय सीमा नहीं होती।













