झारखंड वार्ता संवाददाता
शेखपुरा: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी आवास को लेकर विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और जनप्रतिनिधियों को खुद को जनता का सेवक समझना चाहिए।
शेखपुरा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “यह किसी की बपौती नहीं हो सकती। यह राजतंत्र नहीं है कि एक ही परिवार पीढ़ियों तक एक ही घर में बना रहे। जनता के प्रतिनिधि जनता की सेवा के लिए होते हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे, लेकिन उन्होंने सरकारी आवास में रहने के बजाय अपने निजी घर में रहना उचित समझा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से 2026 तक वे मंत्री, उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री रहे, लेकिन अपने निजी आवास में ही रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार की सेवा का अवसर दिया है।
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया था, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद समय पर सरकारी आवास खाली कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का आचरण जनता के लिए उदाहरण होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने नए आवास को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर “लोक सेवक आवास” लिखवाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि यह जनता की सेवा का स्थान है, किसी व्यक्ति की निजी पहचान का प्रतीक नहीं।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास खाली करने के मुद्दे पर हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।














