रांची: राजधानी रांची के पास रातू थाना क्षेत्र अंतर्गत चितरकोटा बड़का टोली में सोमवार सुबह उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब एक जंगली हाथी अचानक गांव में घुस आया। सुबह से ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना रहा। हाथी के हमले में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक महिला समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, तड़के करीब पांच बजे गांव के आसपास खेतों की ओर हाथी को घूमते देखा गया। कुछ ही देर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और लोग उसे देखने के लिए इकट्ठा हो गए। इसी दौरान स्थिति तब बिगड़ गई जब करीब आठ बजे शराब के नशे में धुत एक युवक हाथी के काफी नजदीक पहुंच गया।
मृतक की पहचान सुबोध खलखो के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक हाथी को ललकारने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी। अचानक हाथी आक्रामक हो गया और युवक पर हमला कर दिया। हाथी ने उसे पटककर कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के दौरान 35 वर्षीय मालती देवी भी हाथी के हमले की शिकार हो गईं। बताया जा रहा है कि हाथी ने उन्हें जोरदार तरीके से पटक दिया और कुचल दिया, जिससे वह बेहोश हो गईं। हमले के बाद हाथी कई घंटों तक घायल महिला के पास ही खड़ा रहा। उसके आक्रामक व्यवहार के कारण कोई भी व्यक्ति उसके नजदीक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की हिदायत दी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने साहस का परिचय दिया और ड्रोन कैमरे के जरिए हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी। मौका मिलते ही कुछ लोगों ने घायल महिला को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई है।
वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार की ओर से निर्धारित चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। झारखंड सरकार के प्रावधान के तहत हाथी के हमले में मृत्यु होने पर यह सहायता राशि दी जाती है।
वन विभाग की एक विशेष टीम हाथी को गांव से बाहर निकालकर जंगल की ओर खदेड़ने में जुटी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखें और किसी भी स्थिति में उन्हें उकसाने की कोशिश न करें।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।













