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टिनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान के निष्पक्ष चुनाव पर संशय!प्रधान पद पर रहते सुरजीत सिंह का नामांकन

On: March 31, 2026 3:39 PM
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जमशेदपुर: टिनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान का चुनाव निष्पक्ष होगा इस पर संशय बरकरार है और कथित रूप से प्रधान सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर और सरदार बलदेव सिंह ने प्रधान पद के लिए नामांकन किया है।इसके खिलाफ टिन प्लेट गुरुद्वारा संगत का दूसरा पक्ष गुरदयाल सिंह मन्नवाल समर्थक भड़क गए हैं। एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गुरुद्वारा कमेटी प्रबंधक प्रधान भगवान सिंह से मिला और उन्हें एक ज्ञापन सौंपते हुए नए प्रधान के चुनाव के लिए केंद्रीय कमेटी एवं टिनप्लेट कमेटी के संविधान के मुताबिक अपनी भूमिका का निर्वहन करने और उसका पालन करने का आग्रह किया है। संगत में सुरजीत सिंह खुशीपुर के इस्तीफा नहीं देने पर भी सवाल उठाया है।

मिलने गए प्रतिनिधि मंडल के मुताबिक केंद्रीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह ने निष्पक्ष संयोजक चुन कर चुनावी प्रक्रिया कराने का आश्वासन दिया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्रधान जी आपके समक्ष हम कुछ जरुरी तथ्य रख रहे हैं जिनकी अनदेखी सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर ने की है।

1. दिनांक 25 मार्च, 2026 की सूचना के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी की जानी है।

2. एक बहुत ही अनोखी बात हुई। 30 मार्च 2026 को सरदार सुरजीत सिंह जी खुशीपुर और सरदार बलदेव सिंह जी शेरो ने प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन पत्र कौन ले रहा है? इसकी जिम्मेदारी किसकी है (नामांकन पत्रों और अन्य दस्तावेजों की निगरानी और रखरखाव की)

3. जब सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर ने नामांकन दाखिल कर दिया है तो वह अब कार्यवाहक प्रधान भी नहीं बने रह सकते हैं? उन्होंने अब तक क्यों इस्तीफा नहीं दिया है? अब उनके अधीन लोकल कमेटी नहीं रह सकती है और ऐसे में सेंट्रल कमेटी की भूमिका और बढ़ जाती है।

4. क्या प्रक्रिया शुरू होने के बाद मौजूदा प्रधान अपने पद पर बने रह सकते हैं?

5. क्या संगत को यह भी नहीं बताया जाना चाहिए कि चुनाव समिति का गठन हुआ है या नहीं?

6. चयन समिति का संयोजक कौन है और इसके सदस्य कौन हैं? आखिरकार सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर की जरूर गलत मंशा होगी जो अभी तक खुलासा नहीं किया है?
7. मतदाताओं की सूची भी नोटिस बोर्ड पर नहीं लगाई गई है, जिससे यह पता चल सके कि कौन वैध मतदाता है और किस कारण से किसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है। प्रस्तावक के पांच नाम देने हैं तो किन का नाम दिया जाएगा? ऐसा भी हो सकता है पांच प्रस्तावक के नाम यदि उम्मीदवार द्वारा दिए जाते हैं, उन पर सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर सवाल उठाएंगे कि प्रस्तावक तो मेंबर है ही नहीं और ऐसे में नामांकन पर्चा खारिज होना ही है, तो उम्मीदवार के लिए लिए कौन सा रास्ता बचेगा? यह शक इसलिए भी है।

8. हम लोगों ने एक आवेदन के साथ ही 25 लोगों का नाम प्रधान सुरजीत सिंह खुशीपुर को दिया था और उनसे कहा था कि यह बताइए कि यह सारे वैध मतदाता है अथवा नहीं? उन्होंने चिट्ठी लेने से भी इनकार किया और कहा कि कौन मतदाता है अथवा नहीं यह नामांकन प्रक्रिया के बाद ही संगत को बताया जाएगा। क्या यह चुनाव का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीका है?

9. दस्तावेजों का रजिस्टर और रिकॉर्ड कहां रखा जाएगा और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होगी?

माननीय प्रधान जी, आज, 31 मार्च 2026 को, सरदार गुरदयाल सिंह मन्नावल और अन्य अपना अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

अतः संगत आपसे अनुरोध करती है कि पूरी प्रक्रिया पर कड़ी नज़र रखें। सेंट्रल कमेटी के संविधान के अनुसार, सेंट्रल कमेटी सभी स्थानीय गुरु‌द्वारों कमेटी की सर्वोच्च है और चुनाव प्रक्रिया के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होने पर सेंट्रल कमेटी को चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और संचालन का पूरा अधिकार है।

हमें उम्मीद है कि आप पंथ और समाज के हित में आवश्यक कदम उठाएंगे और निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने में सहभागिता देंगे।

इस मौके पर मुख्य रूप से गुरदयाल सिंह मन्नवाल हरजिंदर सिंह मत्तेवाल सतपाल सिंह मत्तेवाल प्रताप सिंह कुलवंत सिंह लखबीर सिंह राजेंद्र सिंह तरसिक्का कुलदीप सिंह गुरदीप सिंह ऋषभ सिंह शामिल थे।

इधर खबर है कि गुरदयाल सिंह मन्नवाल अपने समर्थकों के साथ आज संध्या अपना नामांकन कर अपना दम खम दिखाएंगे।

बहरहाल अब देखना है कि केंद्रीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान विवादित टिन प्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान का चुनाव निष्पक्ष कराने में सफल होते हैं या यह भी मामला न्यायालय तक जा सकता है जैसे की साकची का मामला न्यायालय तक पहुंच गया था।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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