गढ़वा: मुख्यालय अवस्थित सोनपुरवा ,गढ़वा में परम आराध्य परम प्रिय तारक ब्रह्म (बाबा) श्री श्री आनंदमूर्ति जी के 105 वें जन्मोत्सव कार्यक्रम के उपलक्ष्य में आनंदमार्गियों ने आनंद पूर्णिमा को बड़े ही धूमधाम से मनाए। इस अवसर पर गढ़वा भुक्ति अन्तर्गत अनेक यूनिट मेराल ,श्री बंशीधर नगर,भवनाथपुर,खरौंधी, रमना,डंडई, रंका,रामकंडा, सगमा ,मझिआंव सहित जिले भर से सैकड़ों की संख्या में आनंदमार्गी बंधु सामूहिक रूप से अनेकानेक कार्यक्रम आयोजित कर अपने आराध्य को श्रद्धा भाव प्रकट किए। इस पावन अवसर पर आसपास के जरूरतमंदों के बीच भोजन खिलाकर नारायण सेवा कर “नर सेवा ही नारायण सेवा है” को संपन्न किया गया। इस पावन अवसर पर अनेक गणमान्य लोगों ,आनंदमार्गी बंधुओं तथा मीडिया बंधु की उपस्थिति में मध्य रात्रि से प्रातःकाल तक भक्तिमय अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र “बाबा नाम केवलम”, साधना,स्वाध्याय,गुरुदेव की आनंद वाणी पाठ तत्पश्चात शोभायात्रा, प्रभात संगीत प्रतियोगिता,कोशिकी नृत्य प्रतियोगिता,तांडव नृत्य सहित आनंद मार्ग दर्शन पर विचार गोष्ठी एवं क्विज का आयोजन किया गया ।इसमें शानदार प्रदर्शन के लिए प्रभात संगीत में अनुपमा देव एवं चाणक्य देव को प्रथम,तृप्ति रानी एवं दिनेश दादा जी को द्वितीय एवं पूजा कुमारी एवं दिनकर देव को तृतीय पुरस्कार मिला।तांडव में रजत देव प्रथम, सुनील देव द्वितीय तथा दिनकर देव तृतीय स्थान प्राप्त किए।कोशिकी नृत्य में चित्रलेखा प्रथम,अनुपमा देव द्वितीय तथा रीना दीदी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।पुरुष कोशिकी में रोहित देव प्रथम,दिनकर देव द्वितीय तथा चाणक्य देव तृतीय पुरस्कार प्राप्त किए।जबकि आनंद मार्ग दर्शन पर आयोजित क्विज में लाल मोहन दादा जी को प्रथम,राज श्री द्वितीय जबकि राम जन्म दादा जी को निर्णायक समिति द्वारा चयन कर भुक्ति प्रधान धर्मेंद्र देव एवं अनेक वरिष्ठ मार्गी तथा देव स्पोर्ट्स के प्रबंधक शुभम देव के कर कमलों से पुरस्कार प्रदान कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया। अनेक वरिष्ठ मार्गियों के द्वारा बाबा के संपूर्ण जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला गया। भुक्ति प्रधान धर्मेंद्र देव ने संबोधित करते हुए बताया कि तृतीय महासंभूति तारक ब्रह्म बाबा श्री श्री आनंद मूर्ति जी का इस धरती पर आविर्भाव संपूर्ण जगत के कल्याण हेतु हुआ है। हम सबको उनके संपूर्ण जीवन दर्शन एवं निर्देशों का अक्षरशः पालन कर आध्यात्मिक प्रगति के पथ पर संपूर्ण मानव जाति को परिचालित कर इसे स्वर्ग से सुंदर बनाकर मोक्ष प्राप्त करने हेतु साधना स्वाध्याय एवं सात्विक जीवन को अपनाना होगा।

इस अवसर पर आभा रानी,तृप्ति रानी,अनुपमा देव, ज्योति देव,साबित्री ,रीना,गायत्री देव,ज्योत्सना ,चित्रलेखा देव, आरती दीदी,निर्मला,पूजा देव, पूर्व भुक्ति प्रधान गिरिजानंद जी,दिनेश प्रसाद जी,डॉ रामानुज प्रसाद जी ,राम जन्म दादा जी,सूचित दादा जी, डॉ लाल मोहन ,रजत देव, वेद प्रकाश देव,सतेंद्र दादा जी, सच्चिदानंद जी,चन्दन जी, आशीष देव, रोहित देव,रमा देव,रागिनी देव,दिनकर देव,मिथलेश देव,प्रतिमा देव,आश्वी,धर्मवीर देव,अनुप देव,अमन देव,कैलाश दादा जी,इंद्रजीत देव,मनोज देव ,ज्योतिर्मय देव ,विश्वजीत देव सहित अनेकों मार्गी बंधु उपस्थित हुए।









