
पलामू: झारखंड के पलामू जिले में भीख मांगने वाले दो बच्चों के पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाए जाने के निशान मिलने के बाद सनसनी फैल गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू बाल कल्याण समिति (CWC) ने दोनों बच्चों को रेस्क्यू कर बाल गृह भेज दिया है। अब बच्चों की मेडिकल जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उनके पेट पर मौजूद निशान किस वजह से हैं। पूरे मामले की जांच अंग तस्करी की आशंका को ध्यान में रखकर की जा रही है।
पलामू सीडब्ल्यूसी ने दोनों बच्चों की विस्तृत मेडिकल जांच के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अधीक्षक को पत्र लिखा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया गया है। मंगलवार को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में दोनों बच्चों की जांच कराई जाएगी। मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही बच्चों के पेट पर चीरा के निशान की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
कोयल नदी के किनारे भीख मांगते मिले थे बच्चे
बताया गया कि पलामू सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष शैलेंद्र चतुर्वेदी को सूचना मिली थी कि मेदिनीनगर में कोयल नदी के तटीय इलाके में कुछ बच्चे भीख मांग रहे हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि बच्चों के पेट पर चीरा या ऑपरेशन जैसे निशान दिखाई दे रहे हैं। सूचना मिलने के बाद सीडब्ल्यूसी और चाइल्डलाइन की टीम ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर जांच की। टीम ने वहां से करीब 10 वर्ष के दो बच्चों को रेस्क्यू कर अपने संरक्षण में लिया। हालांकि, कार्रवाई के दौरान एक अन्य बच्चा मौके से भागने में सफल रहा। फरार बच्चे की तलाश और पूरे नेटवर्क के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
रेस्क्यू किए गए दोनों बच्चों की शुरुआती काउंसलिंग में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। बच्चों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में रहने वाले अपने मामा-मामी के साथ भीख मांगने का काम करते हैं। बच्चों के मुताबिक, भीख मांगकर जो पैसे मिलते हैं, उसका बड़ा हिस्सा उनके मामा-मामी को देना पड़ता है।
गया से पहुंचा दंपती, बच्चों को बताया अपनी संतान
मामला सामने आने के बाद बिहार के गया जिले का रहने वाला एक दंपती सीडब्ल्यूसी के समक्ष पहुंचा। दंपती ने दोनों बच्चों को अपनी संतान बताया है। अब समिति बच्चों और दंपती के बीच संबंध की भी जांच कर रही है। इसके लिए पहचान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सकता है। सीडब्ल्यूसी इस बात की भी जांच कर रहा है कि बच्चे वास्तव में किसके संरक्षण में रह रहे थे और उन्हें पलामू लाकर भीख मांगने के लिए मजबूर तो नहीं किया जा रहा था।
एक बच्चे ने बताई गांठ, दूसरे ने पथरी की बात कही
काउंसलिंग के दौरान बच्चों की ओर से अलग-अलग और कुछ भ्रामक जानकारियां भी सामने आई हैं। इसी वजह से सीडब्ल्यूसी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल जांच और अन्य तथ्यों का सत्यापन कर रहा है। बच्चों की शुरुआती पूछताछ में पेट पर मौजूद निशानों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। एक बच्चे ने बताया कि उसके पेट में गांठ बन गई थी, जबकि दूसरे ने कहा कि उसे पथरी की शिकायत थी। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सीडब्ल्यूसी का कहना है कि बच्चों की बातों में कुछ विरोधाभास और भ्रामक तथ्य भी सामने आए हैं। इसलिए केवल काउंसलिंग के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि बच्चों के पेट पर किस प्रकार का ऑपरेशन हुआ था, कब हुआ था और उसके पीछे चिकित्सकीय कारण क्या था।







