
बोकारो:आदिवासी सेंगेल अभियान के तहत आदिवासी गांव बरुआटांड़ में UN ( United Nations) द्वारा घोषित आबुआ दिशोम आबुआ राज को स्थापित करने हेतू संकल्प एवं एकता प्रार्थना कर विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।जिसकी अध्यक्षता चास प्रखंड युवा मोर्चा कालीचरण किस्कू एवं संचालन सेंगेल सरना धर्म मंडवा बोकारो जिला अध्यक्ष भीम मुर्मू ने किया।

सेंगेल बोकारो जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड कहा कि ने हम पूरे विश्व में 32 वां विश्व आदिवासी दिवस मना रहे हैं। 9 अगस्त 1982 को जब जेनेवा में विश्व में आदिवासियों की घटती आबादी पर चिंता करने की बैठक की गई थी। और 1994 के घोषणा अनुसार 1995 से प्रति वर्ष इसी दिन 9 अगस्त को पूरे विश्व में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। किन्तु फिर भी विश्व में आदिवासियों की घटती आबादी पर अभी तक अंकुश नहीं लगाया जा सका है।

आदिवासी सेंगेल अभियान एक समाजिक संगठन है। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व संसाद सालखन मुर्मू हैं। इन्हीं के नेतृत्व में भारत के 7 प्रदेशों बिहार, बंगाल, असम, उड़ीसा, झारखंड, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश तथा भारत से बाहर नेपाल,भूटान और बंगला देश में भी आदिवासी अस्तित्व को बचाने हेतु आदिवासियों की संवैधानिक, मौलिक अधिकारों को प्राप्त करने की लड़ाई जारी है। किन्तु अभी तक आदिवासियों को उनके मौलिक अधिकारों से भी वंचित रखा गया है। इसलिए आज 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर “आबुआ दिशोम आबुआ राज” को स्थापित करने हेतू हम भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आदिवासियों की रक्षार्थ निम्न मांगे प्रस्तुत करते हैं।
(1) संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित विश्व आदिवासी भाषा दशक (2022-2032जिसमे आदिवासी भाषाओं को बचाने समृद्ध करने) के अनुसार राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त(22.12.2003) सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत प्रथम राजभाषा का दर्जा देकर पठन – पाठन, सरकारी कार्य और रोजगार आदि में उपयोग कर समृद्ध किया जाए। पूर्व संसाद सालखन मुर्मू के द्वारा प्रथम राजभाषा के लिए राष्ट्रपति को प्रेषित पत्र का सकारात्मक प्रत्योतर पत्र संख्या 11034/01/2020 तिथि 5.8.2020 संग्लगन है।
(2)हम भारत देश में लगभग 15 करोड़ आदिवासी हैं,जो अधिकांश आदिवासी हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि नहीं हैं प्रकृति पूजक हैं। उन्हें संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अपना स्वतंत्र धार्मिक मान्यता अर्थात सरना धर्म कोड दिया जाए।यह हमारे अस्तित्व, पहचान और इतिहास का सवाल है। सरना धर्म कोड की मान्यता के लिए पूर्व संसाद सालखन मुर्मू के द्वारा राष्ट्रपति को प्रेषित पत्र का सकारात्मक प्रत्योतर पत्र संख्या 24013/2021-CSR, तिथि 6.9.2021 संग्लगन है।
(3)असम और अण्डमान में बसे झारखंडी आदिवासियों को अविलंब ST(Shedul Tribes)का दर्जा दिया जाए।
(4) CNT/SPT कानून को सख्ती से लागू किया जाए।
(5) आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में परंपरा के नाम पर चालू वंशवादी स्वशासन व्यवस्था में सुधार कर संविधान कानून और जनतंत्र को लागू किया जाए।
(6) झारखण्ड में झारखण्डी स्थानीय नीति/प्रखंडवार नियोजन नीति लागू किया जाए।
इन सभी मुद्दों को लेकर हम आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से लगातार कार्यक्रम, आन्दोलन, पुतला दहन,रेल/रोड,चक्का जाम आदि करते रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इस (9 अगस्त) विश्व आदिवासी दिवस पर आप आदिवासियों के हित में निश्चय ही इन मांगों पर विचार करेंगे।
कार्यक्रम के मौके पर झारखंड प्रदेश संयोजक जयराम सोरेन,कनारी पंचायत सेंगेल परगना सह वार्ड सदस्य राखो किस्कू, जयस सोरेन, जिया सोरेन,नकुल सोरेन,पिताम्बर सोरेन,शिवराम किस्कू,दीपक हेम्बरम,अमर सोरेन, संजूल मुर्मू,मनोज किस्कू, बलबीर किस्कू,रवि कुमार किस्कू,कोशल सोरेन,मुंगेश्वर साथ सोरेन,फागु बेसरा, सावित्री मुर्मू, रीता किस्कू,शिवानी किस्कू,मीरा सोरेन,भूमि हांसदा,खूशबू मुर्मू, अनिता हांसदा आदि लोग उपस्थित थे।
-जयराम सोरेन
झारखंड प्रदेश सेंगेल संयोजक(ASA)
मो न .-9693667646




