{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":false,"containsFTESticker":false}
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गई है। नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संचालकों के परिसरों में हुई छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कोचिंग संस्थानों की कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े लोगों या किसी सिंडिकेट से कोई भूमिका या संपर्क था या नहीं।
कोचिंग संस्थानों के जरिए अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने की जांच
CBI की जांच का एक अहम पहलू यह है कि क्या किसी अभ्यर्थी को कोचिंग संस्थानों से जुड़े संपर्कों के माध्यम से अनुचित तरीके से परीक्षा में सफलता दिलाने की कोशिश की गई थी।
जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि संबंधित कोचिंग संचालकों या उनसे जुड़े लोगों के संपर्क JPSC के अधिकारियों अथवा TDPL के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से जुड़े कथित नेटवर्क तक थे या नहीं। छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर इन कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इंटरव्यू में सफलता के लिए 15 लाख रुपये की कथित डील
जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण आरोपों में से एक सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान CBI को कथित तौर पर बताया कि 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक की डील की गई थी।
हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच एजेंसी की जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। CBI कथित रकम, उसके लेन-देन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
कई नामों और संपर्कों की पड़ताल
जांच के दौरान पतंजलि कोचिंग से जुड़े रवि कुमार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय के नाम सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
CBI अब इन लोगों के बीच संभावित संपर्क, बातचीत और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ था और इसमें कोचिंग संस्थानों की भूमिका वास्तव में क्या थी।
पूर्व JPSC पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में आयोग के पूर्व पदाधिकारियों की कथित भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य पर इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को सफल कराने के नाम पर अपने पीए के माध्यम से पैसे लेने का आरोप जांच के दायरे में है।
इसी तरह पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से जुड़े भी गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है। रिपोर्टों में मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर के माध्यम से पैसे लिये जाने का आरोप सामने आने की बात कही गई है। इन आरोपों की सत्यता की जांच अभी जारी है और इन्हें फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
छापेमारी में मिले दस्तावेज बन सकते हैं अहम कड़ी
CBI कोचिंग संचालकों के परिसरों से मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को जांच में महत्वपूर्ण मान रही है। इन्हीं के आधार पर एजेंसी संभावित संपर्कों, अभ्यर्थियों और कथित लेन-देन के बीच संबंध तलाश रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी किसी सीमित स्तर तक थी या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था। आने वाले दिनों में दस्तावेजों की जांच, पूछताछ और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल से मामले में और नाम सामने आने की संभावना है।
जांच के बढ़ते दायरे से बढ़ी हलचल
JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार अलग-अलग लोगों और संस्थानों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। हालिया जांच में सफल अभ्यर्थियों से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल किए जाने की रिपोर्ट है।
अब CBI की नजर कोचिंग संस्थानों पर जाने से जांच का एक नया पहलू सामने आया है। हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्थान की भूमिका केवल जांच में नाम आने या छापेमारी होने से साबित नहीं होती। अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में CBI ने रांची और हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी खंगालनी शुरू की है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर कथित सिंडिकेट और 15 लाख रुपये की डील से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।






