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धनबाद: धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह हत्याकांड में करीब नौ साल बाद शनिवार, 19 सितंबर 2026 को धनबाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने मामले के आरोपी हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। दोनों के खिलाफ अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।
इस मामले में पहले 5 सितंबर को फैसला सुनाया जाना था। हालांकि, कानूनी बिंदुओं पर बहस के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से समय मांगे जाने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 19 सितंबर को फैसला सुनाया गया।
चश्मदीद ने आरोपी को पहचानने से किया इनकार
बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव के अनुसार, अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश किए गए गवाह ने गोली चलाने के आरोपी नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा की पहचान करने से इनकार कर दिया। अधिवक्ता ने बताया कि अभियोजन के मामले में नंदकिशोर को कथित शूटर बताया गया था, लेकिन अदालत के समक्ष उसकी पहचान स्थापित नहीं हो सकी।
बचाव पक्ष के मुताबिक, अदालत ने इसी महत्वपूर्ण बिंदु को ध्यान में रखते हुए माना कि जब कथित हत्यारे की पहचान ही साबित नहीं हो सकी, तो उसके साथ कथित साजिशकर्ता के रूप में आरोपित व्यक्ति के खिलाफ भी साजिश का आरोप किस आधार पर कायम रखा जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह दोनों को दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव, अधिवक्ता आयुष श्रीवास्तव और सिद्धार्थ शर्मा ने पैरवी की।
29 जनवरी 2017 को हुई थी रंजय सिंह की हत्या
रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 को धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित चाणक्य नगर मोड़ के पास हुई थी। घटना शाम करीब 5:30 बजे बिग बाजार के सामने हुई थी।
बताया गया कि रंजय सिंह अपने सहयोगी राजा यादव के साथ स्कूटी से जा रहे थे। वह चाणक्य नगर स्थित अपने फ्लैट से दूध का बर्तन लेकर सिंह मेंशन की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बाइक सवार दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
गोली लगने से रंजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के दौरान उनके साथ मौजूद राजा यादव बाल-बाल बच गए थे।
राजा यादव की शिकायत पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
घटना के बाद राजा यादव की शिकायत पर सरायढेला थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस जांच में राजा यादव को प्रमुख चश्मदीद गवाह बनाया गया था। पुलिस के अनुसार, उनकी ओर से बनवाए गए स्केच के आधार पर कथित शूटरों की पहचान की गई थी और जांच आगे बढ़ाई गई।
मामले में नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को 8 अगस्त 2018 से जेल में बंद रखा गया था। तत्कालीन सरायढेला थाना प्रभारी निरंजन तिवारी ने 5 नवंबर 2018 को नंदकिशोर सिंह को कथित शूटर बताते हुए उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। वहीं, चंदन शर्मा और हरेन्द्र सिंह के खिलाफ उस समय अनुसंधान जारी रखा गया था।
बाद में पुलिस ने 11 दिसंबर 2025 को चंदन शर्मा को फरार बताते हुए उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। चंदन शर्मा फिलहाल इस मामले में पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसके विरुद्ध उसकी अनुपस्थिति में सुनवाई चल रही है।
सिंह मेंशन और रघुकुल के बीच बढ़ा था विवाद
रंजय सिंह को तत्कालीन झरिया विधायक संजीव सिंह का करीबी माना जाता था। उनकी हत्या के बाद सिंह मेंशन और रघुकुल से जुड़े परिवारों के बीच राजनीतिक और पारिवारिक विवाद और गहरा गया था। हत्या के पीछे रघुकुल से जुड़े लोगों की संलिप्तता का आरोप लगाया गया था।
मामले में तत्कालीन डिप्टी मेयर नीरज सिंह के मौसेरे भाई हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को आरोपी बनाया गया था। अभियोजन के अनुसार, हर्ष सिंह पर हत्या की कथित साजिश में शामिल होने और नंदकिशोर सिंह पर गोली चलाने का आरोप था। हालांकि, अब अदालत ने दोनों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।







