
काठमांडू: नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अकेले नेपाल में 903 लोगों की जान गई है, जबकि तिब्बत में मृतकों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। वहीं, करीब 4247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा के छठे दिन भी राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। बचाव दल मलबे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं तथा अलग-अलग स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
लगातार कई दिनों तक पानी में पड़े रहने के कारण बड़ी संख्या में बरामद शवों की स्थिति खराब हो गई है। ऐसे में उनकी पहचान करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसी बीच नेपाल में अज्ञात शवों को सामूहिक रूप से दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
चितवन के देवघाट जंगल क्षेत्र में प्रशासन की ओर से सैकड़ों कब्रें तैयार की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो दिनों में 196 शवों को दफनाया जा चुका है। प्रत्येक शव को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जा रही है और उसका पूरा विवरण सरकारी अभिलेख में दर्ज किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि शवों की पहचान के लिए आगे डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। डीएनए जांच के माध्यम से मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद शव उनके परिजनों को सौंपने का प्रयास किया जाएगा।
नेपाल के विभिन्न जिलों में राहत और बचाव अभियान के दौरान बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चितवन से 272, नवलपरासी पूर्व से 207, नवलपरासी पश्चिम से 151 और गोरखा जिले से 62 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नुवाकोट से 95, धाडिंग से 55, तनहुं से 37 और रसुवा से 24 शव बरामद किए गए हैं।
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और उनकी तलाश लगातार जारी है। प्रशासन के अनुसार, नेपाल में 4247 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 85 सुरक्षाकर्मी और 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, नदियों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चलाने तथा संपर्क से कटे गांवों तक पहुंचने में जुटे हैं। खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां राहत एवं बचाव कार्य में लगातार चुनौती बनी हुई हैं।







