रानीश्वर:आदिवासी सेंगेल अभियान ने शहीदों को किया नमन, समाज के लिए रखी मांगे
रानीश्वर:आदिवासी सेंगेल अभियान की से रानीश्वर प्रखण्ड के सालतोला सिदो मुर्मू, कान्हु मुर्मू चौक में सेंगेल महिला मोर्चा प्रखण्ड अध्यक्ष कविता मुर्मू के नेतृत्व में सिदो, मुर्मू कान्हु मुर्मू के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर हुल दिवस मनाया गया।

30 जून हूल दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज के लिए आदिवासी सेंगेल अभियान की प्रमुख मांगे।
दुमका जोनल हेड बार्नाड हांसदा ने कहा कि 30 जून 1855 को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ महान् वीर शहीद सिदो मुर्मू के नेतृत्व में हुए ऐॆतिहासिक संताल हूल का 171 वां हूल दिवस मनाते हुए हम आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से आदिवासी समाज हित में भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से निम्न मांगे प्रस्तुत करती है।
(1) भारत के लगभग 15 करोड़ आदिवासी जो अधिकांश आदिवासी हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि नहीं हैं, प्रकृति पूजक हैं। उनको स्वतंत्र धार्मिक मान्यता अर्थात “सरना धर्म” कोड प्रदान करने।
(2) आदिवासियों के महान धार्मिक स्थल झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित मरांग बुरु, (पारसनाथ पहाड़)बोकारो जिले के लालपनिया में स्थित लुगुबुरु, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में स्थित अयोदिया बुरु को अन्य धार्मों के अतिक्रमण से बचाने।
(3) राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में प्रथम राजभाषा का दर्जा देने।
(4) आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के नाम पर चालू वंशवादी स्वशासन व्यवस्था में सुधार कर संविधान कानून और जनतंत्र को लागू करना।
(5) आदिवासियों के समाजिक, धार्मिक कार्यक्रम में नशा(शराब)की जगह बेरेल दा:(निर्मल जल) से करने।
(6)असम और अण्डमान के झारखंडी आदिवासियों को ST का दर्जा देने।
(7) महान् वीर शहीद सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा के वंशजों के नाम दो ट्रस्ट बना कर प्रत्येक को 100-100 करोड़ रुपए का जमा पूंजी (अनुदान) देने आदि।
आजाद भारत के इतिहास में आज भी आदिवासी समाज अपने इन मौलिक अधिकारों से वंचित हैं, जो आदिवासी समाज के लिए दुर्भाग्य की बात है। आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व संसाद सालखन मुर्मू के नेतृत्व में लगातार इन मुद्दों को लेकर आन्दोलन किए जा रहे हैं।
अत: हम भारत के माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह करते हैं कि आदिवासी समाज हित में इन सभी मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई करेंगें।
जोहार!
