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काठमांडू: तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करने वाली भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय इलाकों के बाजार और कई जलविद्युत परियोजनाएं जलमग्न और क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा जिले के स्याफ्रूबेसी और टिमुरे इलाकों में देखने को मिला है। बाढ़ की चपेट में नदी किनारे बसे गांवों के साथ-साथ कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी आ गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना के दो हेलीकॉप्टर रसुवा रवाना किए गए हैं।
प्रारंभिक सूचनाओं के मुताबिक, बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में 1,000 से ज्यादा लोगों के बह जाने की बात सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों, लोगों और सुरक्षा एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारी से बड़े पैमाने पर नुकसान का संकेत मिलता है। अब तक 13 शवों को निकाला जा चुका है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
अचानक आई बाढ़ के बाद प्रशासन ने भोटे कोशी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। तेज बहाव के कारण नदी किनारे स्थित कई इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
रसुवा के जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने बताया कि बाढ़ से गांवों और विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बह जाने की रिपोर्ट मिली है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जानमाल के नुकसान का सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है। हालांकि, बाढ़ की भयावहता को देखते हुए बड़े पैमाने पर जनहानि और संपत्ति के नुकसान की आशंका बनी हुई है।
बाढ़ से हुई भारी तबाही के बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन को लेकर आपात बैठक बुलाई है। प्रधानमंत्री के सलाहकार असीम शाह के मुताबिक प्रधानमंत्री प्रभावित क्षेत्रों के प्रमुख जिलाधिकारियों के संपर्क में हैं और हालात की लगातार निगरानी कर रहे हैं।




