
रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है और आवश्यक जांच के आधार पर उपचार किया जा रहा है।
बताया गया कि देवेंद्र नाथ महतो को तेज बुखार के साथ लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। इसके अलावा पूरे शरीर में दर्द और कमजोरी की भी समस्या सामने आई। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने उनकी जांच शुरू की और स्वास्थ्य की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने अपने साथियों, छात्रों, अभ्यर्थियों, अभिभावकों और शुभचिंतकों से परेशान नहीं होने की अपील की। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल बुखार, उल्टी और दस्त की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लिवर फंक्शन और पाचन तंत्र को पर्याप्त सपोर्ट नहीं मिल पाने के कारण शरीर में आई कमजोरी को देखते हुए चिकित्सकीय निगरानी और आराम जरूरी है।
डॉक्टरों ने उन्हें पर्याप्त आराम करने, समय पर खान-पान लेने और नियमित उपचार जारी रखने की सलाह दी है।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि लंबे समय तक संघर्ष, अनशन-धरना, लगातार यात्रा और पर्याप्त आराम व समय पर खान-पान नहीं मिलने के कारण शरीर काफी कमजोर हो गया है। उन्होंने समर्थकों और झारखंडवासियों से अपने लिए दुआ और आशीर्वाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि चिकित्सकीय देखरेख और आराम के बाद वह जल्द स्वस्थ होकर दोबारा अपने साथियों और युवाओं के बीच लौटेंगे।
दरअसल, देवेंद्र नाथ महतो पिछले लंबे समय से झारखंड की भर्ती परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने कई चरणों में आंदोलन किया है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ उनका आंदोलन बाद में धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन तक पहुंचा।
इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर उन्होंने 24 जिलों की भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा शुरू की। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जिलों में युवाओं, अभ्यर्थियों और स्थानीय लोगों से संवाद किया तथा भर्ती व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को समझने और उन्हें सामने लाने की कोशिश की।
लगातार कई दिनों तक आंदोलन, अनशन और जिलों की यात्रा के बाद उनकी यह यात्रा 11 सितंबर को रांची में समाप्त हुई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।






