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शुभम जायसवाल
गढ़वा: छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड में जारी सियासी घमासान का असर अब गढ़वा जिले की राजनीति में भी साफ दिखाई देने लगा है। आंदोलन, पुतला दहन और राजनीतिक बयानबाजी के बीच सोशल मीडिया पर नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। खासकर भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक अनंत प्रताप देव और पूर्व मंत्री सह पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही के बीच सोशल मीडिया पर हुई तीखी नोकझोंक चर्चा का विषय बनी हुई है।
दरअसल, छात्र आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार जुबानी जंग चल रही है। इसी बीच विधायक अनंत प्रताप देव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही पर निशाना साधते हुए तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “भवनाथपुर विधानसभा सहित पूरे झारखंड राज्य को कलंकित करने वाले महामानव। एक दिन आपकी जगह वहीं है। कारनामा आपका चर्चित है, लोग भूले नहीं हैं।”
भानु ने भी किया पलटवार
विधायक के इस पोस्ट के बाद पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने भी सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा, “आराम से राजा जी, प्रेस कांफ्रेंस में आहिस्ता बोलते हैं, कहीं प्रेसर में नस फट गया तो लोग बोलेगा भानु जी के चलते ऐसा हुआ, आराम से थोड़ा।”
दोनों नेताओं की इस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनके समर्थकों के बीच भी कमेंट और प्रतिक्रिया का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे मौजूदा छात्र आंदोलन के बीच गढ़वा की सियासत में बढ़ती तल्खी के रूप में देखा जा रहा है।
छात्र आंदोलन से गरमाया जिले का सियासी माहौल
छात्र आंदोलन के मुद्दे पर पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही लगातार सरकार के खिलाफ मुखर नजर आ रहे हैं। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर भी आंदोलन को लेकर राजनीतिक मोर्चे पर सक्रिय हैं। उनके मैदान में उतरने के बाद भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव भी विपक्ष पर हमलावर दिखाई दे रहे हैं।
मिथिलेश ठाकुर और भानु प्रताप शाही दोनों गढ़वा जिले की राजनीति के प्रमुख चेहरे रहे हैं। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में दोनों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद दोनों नेताओं की राजनीतिक सक्रियता बनी हुई है।
सोशल मीडिया बना सियासी अखाड़ा
छात्र आंदोलन के बहाने गढ़वा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। अब सोशल मीडिया भी इस सियासी जंग का प्रमुख मंच बन गया है। नेताओं के पोस्ट के बाद समर्थकों की प्रतिक्रियाओं से माहौल और गर्म हो रहा है।
ऐसे में छात्र आंदोलन का मुद्दा जहां राज्य की राजनीति को प्रभावित कर रहा है, वहीं इसकी राजनीतिक तपिश गढ़वा जिले तक भी पहुंच गई है। आने वाले दिनों में नेताओं के बीच यह जुबानी जंग किस दिशा में जाती है, इस पर राजनीतिक जानकारों और आम लोगों की नजर बनी हुई है।






