झारखंड वार्ता संवाददाता
श्री बंशीधर नगर (गढ़वा): झारखंड कैबिनेट के हालिया फैसलों को लेकर राज्य की राजनीति तेज हो गई है। जेटेट परीक्षा से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने और श्री बंशीधर नगर के नाम में बदलाव के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
पूर्व मंत्री सह भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने इन दोनों फैसलों को जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे आम जनता को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के मुद्दों से भटककर केवल अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है।
जेटेट में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर नाराजगी
भानु प्रताप शाही ने जेटेट की सूची से भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को बाहर रखने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह मांग सिर्फ भाजपा की नहीं थी, बल्कि सत्तारूढ़ दल के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इसे उठाया था। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार के ही नेता इस मुद्दे पर सहमत थे, तो कैबिनेट ने इसे नजरअंदाज क्यों किया।
नाम परिवर्तन पर उठाए सवाल
श्री बंशीधर नगर के नाम में ‘उंटारी’ शब्द जोड़ने के फैसले पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। उन्होंने इसे जनभावनाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने बंशीधर महोत्सव की शुरुआत के साथ इस क्षेत्र का नाम ‘श्री बंशीधर नगर’ रखा था, जो आस्था और पहचान का प्रतीक बन चुका है।
वित्त मंत्री पर कसा तंज
कैबिनेट बैठक से पहले वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अस्वस्थ होने पर भी भानु प्रताप शाही ने तंज कसते हुए कहा कि यह भी जांच का विषय है कि वे वास्तव में बीमार थे या किसी अन्य कारण से बैठक से दूर रहे।
भौगोलिक स्थिति का दिया तर्क
भानु प्रताप शाही ने कहा कि ‘नगर’ गढ़वा जिले में स्थित है, जबकि ‘उंटारी’ पलामू जिले का हिस्सा है। ऐसे में नाम परिवर्तन का कोई तार्किक आधार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय केवल व्यक्तिगत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को नाम बदलने जैसे मुद्दों से हटकर जनहित के कार्यों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि राज्य के लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके।














